सुप्रीम कोर्ट ने Reliance Communications से जुड़े fraud classification मामले में अनिल अंबानी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

₹2,929 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में सख्ती’: अनिल अंबानी से दूसरे दिन 7 घंटे पूछताछ, फंड डायवर्जन पर उठे सवाल

Team The420
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नई दिल्ली। ₹2,929 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में उद्योगपति Anil Ambani से दूसरे दिन भी लंबी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने उनसे लगातार सात घंटे तक सवाल-जवाब किए, जिसमें कंपनी के वित्तीय लेनदेन, लोन उपयोग और कथित फंड डायवर्जन को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी गई। इससे पहले एक दिन पहले भी उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई थी, जिससे यह स्पष्ट है कि जांच अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है।

यह मामला State Bank of India की शिकायत पर दर्ज किया गया है, जिसमें आरोप है कि Reliance Communications से जुड़े लोन में गंभीर अनियमितताएं और धोखाधड़ी हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी को जारी किए गए कर्ज के उपयोग में गड़बड़ी, फंड के कथित हेरफेर और गबन जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।

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सूत्रों के अनुसार, अनिल अंबानी निर्धारित समय पर सुबह करीब 10 बजे जांच मुख्यालय पहुंचे और शाम करीब 5:15 बजे तक उनसे पूछताछ जारी रही। इस दौरान अधिकारियों ने उनसे कई दस्तावेजों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और कंपनी के वित्तीय फैसलों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। विशेष रूप से यह समझने की कोशिश की जा रही है कि लोन की राशि का वास्तविक उपयोग क्या था और क्या इसे निर्धारित उद्देश्यों से हटाकर कहीं और डायवर्ट किया गया।

जांच एजेंसी ने इससे पहले भी इस मामले में कई वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और कंपनी के आंतरिक लेनदेन से जुड़े कागजात जुटाए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर अब पूछताछ को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान मिले जवाब और पहले से उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर केस को और मजबूत किया जाएगा।

इसी बीच, एक अलग लेकिन संबंधित वित्तीय अनियमितता के मामले में Divi Dangi से भी पूछताछ की गई है। यह मामला Reliance Commercial Finance Limited से जुड़े ₹57.47 करोड़ के कथित धोखाधड़ी से संबंधित है। जांच में यह सामने आया है कि Authum Investment & Infrastructure Limited ने उन कंपनियों की कुछ संपत्तियों का अधिग्रहण किया था, जो जांच के दायरे में हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में यह जांच की जा रही है कि संपत्तियों के अधिग्रहण और वित्तीय लेनदेन के दौरान कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इन सौदों का संबंध बड़े बैंक फ्रॉड केस से जुड़ा हुआ है या नहीं।

जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों मामलों में वित्तीय लेनदेन की परतें जटिल हैं और इसमें कई कंपनियों, डायरेक्टर्स और इंटरमीडियरी इकाइयों की भूमिका सामने आ रही है। ऐसे में हर लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क को समझा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े बैंक फ्रॉड मामलों में अक्सर फंड को कई कंपनियों और खातों के जरिए घुमाया जाता है, जिससे असली लेनदेन को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां अब डिजिटल ट्रेल, बैंक रिकॉर्ड और कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं।

फिलहाल, पूछताछ का दौर जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट और बैंकिंग फ्रॉड मामलों में से एक माना जा रहा है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं

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