नई दिल्ली। देश में फिल्म पायरेसी के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा डिजिटल एक्शन लेते हुए 3,100 से अधिक टेलीग्राम चैनलों और करीब 800 वेबसाइटों को बंद करा दिया है। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक ये सभी प्लेटफॉर्म बिना अनुमति फिल्मों और ओटीटी कंटेंट को प्रसारित कर रहे थे, जिससे फिल्म इंडस्ट्री को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था।
लोकसभा में एक लिखित जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि हाल के महीनों में पायरेसी पर नकेल कसने के लिए कानूनी और तकनीकी दोनों स्तरों पर कार्रवाई तेज की गई है। इस अभियान के तहत 3,142 टेलीग्राम चैनलों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISP) के माध्यम से लगभग 800 वेबसाइटों तक पहुंच को भी ब्लॉक कर दिया गया।
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सरकार के मुताबिक, ये सभी चैनल और वेबसाइट्स कॉपीराइट कानून का उल्लंघन करते हुए फिल्मों और वेब सीरीज को बिना लाइसेंस के अपलोड और शेयर कर रहे थे। कई मामलों में नई रिलीज फिल्मों को सिनेमाघरों या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने के कुछ ही घंटों में लीक कर दिया जाता था, जिससे प्रोड्यूसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को करोड़ों रुपये का नुकसान होता था।
कानूनी ढांचे को मिला और मजबूत आधार
सरकार ने यह भी बताया कि सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 लागू होने के बाद पायरेसी के खिलाफ कार्रवाई और सख्त हो गई है। इस कानून में जोड़े गए नए प्रावधान—धारा 6AA और 6AB—अवैध रूप से फिल्मों की रिकॉर्डिंग और उनके प्रसारण को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में लाते हैं।
इन प्रावधानों के तहत यदि कोई व्यक्ति फिल्म की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग करता है या उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करता है, तो उसे कम से कम 3 महीने की जेल और ₹3 लाख का जुर्माना हो सकता है। गंभीर मामलों में सजा 3 साल तक बढ़ाई जा सकती है और जुर्माना फिल्म के कुल प्रोडक्शन कॉस्ट का 5% तक पहुंच सकता है।
सरकार का कहना है कि इन सख्त प्रावधानों का उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि डिजिटल पायरेसी के बढ़ते नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है।
आईटी एक्ट के तहत भी कार्रवाई
पायरेसी के खिलाफ इस व्यापक अभियान में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 का भी सहारा लिया गया। सरकार ने 11 मार्च 2026 को टेलीग्राम प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी कर इन 3,142 चैनलों को हटाने और उनकी पहुंच को बंद करने के निर्देश दिए थे।
इसके अलावा, जिन वेबसाइट्स के जरिए पायरेटेड कंटेंट होस्ट किया जा रहा था, उन्हें इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के जरिए ब्लॉक किया गया, ताकि आम यूजर्स इन साइट्स तक पहुंच ही न सकें।
फिल्म इंडस्ट्री को राहत, लेकिन चुनौती बरकरार
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई फिल्म और ओटीटी इंडस्ट्री के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि लंबे समय से पायरेसी एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग के साथ पायरेसी के तरीके भी तेजी से बदल रहे थे, जिससे कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अपनी कमाई को सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा था।
हालांकि, जानकार यह भी मानते हैं कि पायरेसी का नेटवर्क बेहद जटिल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है। ऐसे में केवल चैनल और वेबसाइट ब्लॉक करने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए लगातार निगरानी, तकनीकी अपग्रेड और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत होगी।
डिजिटल स्पेस में सख्ती का संकेत
सरकार की इस कार्रवाई को डिजिटल स्पेस में बढ़ती अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। साफ संकेत है कि अब कॉपीराइट उल्लंघन और पायरेसी जैसे मामलों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
आने वाले समय में इस तरह की कार्रवाई और तेज हो सकती है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की सुरक्षा और मजबूत होगी और फिल्म इंडस्ट्री को होने वाले नुकसान पर लगाम लगाई जा सकेगी।
