रांची में फर्जी GAIL कस्टमर केयर नंबर और लिंक के जरिए गैस कनेक्शन दिलाने के बहाने ₹20 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया।

‘एक क्लिक में साफ हुआ खाता’: फर्जी GAIL कॉल से ₹20 लाख की ठगी, गैस कनेक्शन के बहाने साइबर जाल

Team The420
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रांची। गैस कनेक्शन दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को करीब ₹20 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। आरोपियों ने खुद को GAIL (India) Limited का प्रतिनिधि बताकर पीड़ित को झांसे में लिया और एक लिंक के जरिए उसके बैंक खाते से पूरी रकम साफ कर दी।

मामले के अनुसार, पीड़ित नया गैस कनेक्शन लेने के लिए इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर खोज रहा था। इसी दौरान उसे सर्च इंजन पर एक नंबर मिला, जो असल में साइबर ठगों द्वारा तैयार किया गया फर्जी संपर्क था। पीड़ित ने जैसे ही उस नंबर पर कॉल किया, दूसरी तरफ मौजूद लोगों ने खुद को कंपनी का अधिकारी बताते हुए भरोसा जीत लिया।

रजिस्ट्रेशन के नाम पर भेजा गया लिंक बना जाल

ठगों ने गैस कनेक्शन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के नाम पर पीड़ित के मोबाइल पर एक लिंक भेजा और कहा कि रजिस्ट्रेशन पूरा करने के लिए इसे खोलना जरूरी है। बिना सत्यापन के पीड़ित ने जैसे ही लिंक पर क्लिक किया, उसके मोबाइल डिवाइस और बैंकिंग जानकारी तक ठगों की पहुंच बन गई।

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कुछ ही देर में पीड़ित के खाते से ₹19,85,073 की रकम अलग-अलग ट्रांजैक्शनों के जरिए निकाल ली गई। जब तक उसे इस धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तब तक खाता लगभग खाली हो चुका था।

तकनीकी ट्रैकिंग से आरोपियों तक पहुंची जांच

शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई और डिजिटल ट्रेल के आधार पर तीन आरोपियों—रवि कुमार साव, सूरज कुमार ठाकुर और सागर कुमार यादव—को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपी हजारीबाग जिले के रहने वाले बताए गए हैं।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से फर्जी कस्टमर केयर नंबर बनाकर लोगों को निशाना बना रहा था। गैस कनेक्शन, बिजली बिल और बैंकिंग सेवाओं जैसे जरूरी कामों के नाम पर लोगों की जरूरत का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाया जाता था।

जरूरी सेवाओं के नाम पर बढ़ रहा साइबर खतरा

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एलपीजी कनेक्शन से जुड़ी ठगी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। हालांकि हालिया समय में इसमें कोई असामान्य उछाल नहीं दिखा, लेकिन जैसे-जैसे जरूरी सेवाओं की मांग बढ़ती है, वैसे-वैसे इस तरह के गिरोह सक्रिय हो जाते हैं।

साइबर अपराध के जानकारों के मुताबिक, अब ठग सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर तकनीकी माध्यमों से उनके खातों तक पहुंच बना लेते हैं।

‘सिर्फ एक गलती, पूरा नुकसान’—विशेषज्ञों की चेतावनी

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधी सीधे तकनीकी हैकिंग नहीं करते, बल्कि “सोशल इंजीनियरिंग” का सहारा लेते हैं।
उन्होंने कहा, “ठग पहले पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और उसे यह महसूस कराते हैं कि वह किसी आधिकारिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जैसे ही व्यक्ति लिंक पर क्लिक करता है या जानकारी साझा करता है, पूरा नियंत्रण अपराधियों के पास चला जाता है। एक छोटी सी गलती बड़े आर्थिक नुकसान में बदल जाती है।”

कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से?

  • सर्च इंजन पर दिख रहे हर नंबर पर आंख बंद कर भरोसा न करें
  • केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही कस्टमर केयर नंबर लें
  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें
  • फोन या मैसेज पर बैंकिंग/व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें
  • ठगी का शक होते ही तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें

डिजिटल ठगी के बदलते तरीके

यह घटना साफ संकेत देती है कि साइबर अपराध अब तेजी से अपने तरीके बदल रहा है। पहले जहां ठगी केवल कॉल तक सीमित थी, वहीं अब लिंक, ऐप और फर्जी वेबसाइट्स के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। अगर उपयोगकर्ता हर ऑनलाइन प्रक्रिया को सावधानी से अपनाएं और सत्यापित स्रोतों का ही उपयोग करें, तो इस तरह की घटनाओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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