आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी निवेश के बीच कंपनी का बड़ा पुनर्गठन; करीब 15 हजार नौकरियों पर संकट के संकेत

AI की दौड़ में ‘जॉब कट’ का बड़ा झटका: Meta में 20% वर्कफोर्स पर खतरा, हजारों कर्मचारियों पर तलवार

Team The420
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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज़ रफ्तार ने टेक इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदलना शुरू कर दिया है, और अब इसका असर नौकरियों पर भी साफ दिखने लगा है। सोशल मीडिया दिग्गज Meta में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी की खबरें सामने आई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।

मामले से जुड़े रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपने कुल वर्कफोर्स का करीब 20 प्रतिशत तक घटाने की योजना पर काम कर रही है। 31 दिसंबर तक Meta में लगभग 79 हजार कर्मचारी कार्यरत थे। ऐसे में अगर यह योजना लागू होती है, तो करीब 15 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। यह हाल के वर्षों में टेक सेक्टर की सबसे बड़ी छंटनियों में से एक मानी जा रही है।

दरअसल, Mark Zuckerberg के नेतृत्व में Meta अब तेजी से AI-फोकस्ड कंपनी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी अपने प्लेटफॉर्म्स—Facebook और Instagram—पर AI आधारित फीचर्स को मजबूत करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। इसी रणनीति के तहत पारंपरिक भूमिकाओं में कटौती और नई टेक्नोलॉजी आधारित पदों पर फोकस बढ़ाया जा रहा है।

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कंपनी के भीतर चल रहे इस बदलाव को ‘स्ट्रक्चरल रीऑर्गनाइजेशन’ के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI के बढ़ते उपयोग के कारण कई ऐसे काम, जिन्हें पहले इंसानों द्वारा किया जाता था, अब ऑटोमेशन के जरिए संभव हो रहे हैं। इससे कंपनियां लागत घटाने और दक्षता बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं।

टेक इंडस्ट्री में यह ट्रेंड नया नहीं है, लेकिन इस बार इसका पैमाना कहीं ज्यादा बड़ा दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ महीनों में कई बड़ी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ अपने वर्कफोर्स में कटौती कर चुकी हैं। Meta का यह संभावित कदम उसी दिशा में एक और बड़ा संकेत माना जा रहा है।

जानकारों के मुताबिक, कंपनी उन क्षेत्रों में ज्यादा निवेश कर रही है, जहां भविष्य की ग्रोथ की संभावनाएं हैं—जैसे जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन टूल्स। इसके चलते पारंपरिक ऑपरेशंस, सपोर्ट और मिड-लेवल मैनेजमेंट रोल्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर इस छंटनी के पूरे दायरे और टाइमलाइन को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि आने वाले महीनों में Meta अपने वर्कफोर्स को बड़े स्तर पर रीस्ट्रक्चर करने जा रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि AI का विस्तार किस हद तक रोजगार के लिए चुनौती बन सकता है। जहां एक तरफ नई टेक्नोलॉजी नए अवसर पैदा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक नौकरियां तेजी से खत्म भी हो रही हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में कर्मचारियों को स्किल अपग्रेड और नई तकनीकों को सीखने पर ज्यादा ध्यान देना होगा, ताकि बदलते इंडस्ट्री ट्रेंड के साथ खुद को बनाए रखा जा सके। फिलहाल, Meta की इस संभावित छंटनी ने ग्लोबल टेक जॉब मार्केट में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

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