सहारनपुर। साइबर क्राइम की बड़ी वारदात में सहारनपुर पुलिस ने लखनऊ के एक गैंग को गिरफ्तार किया, जिसने डॉक्टर से आयुष्मान भारत योजना के बकाया भुगतान दिलाने के झांसे में लगभग ₹90.59 लाख की ठगी की। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से ₹7 लाख नकद और ठगी से खरीदी गई एक लग्जरी कार बरामद की। ठगों ने उक्त रकम और महिला साथी के साथ देशभर में यात्रा की थी। न्यायालय के आदेश के बाद सोमवार को बरामद नकदी पीड़ित डॉक्टर को सौंप दी गई।
सहारनपुर पुलिस लाइन सभागार में प्रेस वार्ता में एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि जनकपुरी निवासी सर्जन डॉ. प्रभात कुमार वर्मा ने 11 नवंबर 2024 को साइबर क्राइम शाखा में शिकायत दर्ज कराई थी। डॉ. वर्मा ने बताया कि साइबर अपराधियों ने आयुष्मान योजना के तहत किए गए उपचार के बकाया भुगतान दिलाने का भरोसा दिलाया और धीरे-धीरे लगभग ₹90.59 लाख को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिया।
जांच में सामने आया कि पुलिस ने पहले ही आरोपियों के खातों में ₹2.76 लाख फ्रीज कर दिए थे। मुख्य आरोपी की निशानदेही पर उसके घर से ₹7 लाख नकद बरामद किए गए, जबकि गैंग की महिला साथी के पास से स्कोडा कार जब्त की गई। कार भी ठगी के पैसे से खरीदी गई थी।
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पुलिस ने पहले ही लखनऊ निवासी अंकित जायसवाल, अभय शर्मा और विवेक शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बरामद नकदी अदालत में प्रस्तुत की गई और न्यायालय के आदेश के बाद सोमवार को पीड़ित डॉक्टर को ₹7 लाख लौटाए गए।
एसपी सिटी व्योम बिंदल ने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन लेन-देन से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करें, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर भरोसेमंद दिखने वाले प्रलोभनों से लोगों को वित्तीय नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराधियों की तकनीक लगातार विकसित हो रही है और वे सरकारी योजनाओं और डिजिटल भुगतान प्रणाली का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराध कर रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया कि भुगतान या संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले आधिकारिक चैनलों की पुष्टि करें और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों से परामर्श लें।
सहारनपुर पुलिस की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि पेशेवरों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। अधिकारियों ने सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और ऑनलाइन तथा टेलीकॉम लेन-देन की निगरानी कड़ी करने की आवश्यकता पर बल दिया।
