एसएमएस में भेजे गए लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में इंस्टॉल हुआ रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर; बैंकिंग डिटेल मिलते ही जालसाजों ने खाते से कई ट्रांजेक्शन कर निकाली रकम

एक क्लिक और खाली हो गया खाता: फर्जी चालान मैसेज से पुणे में दुकानदार से ₹2.76 लाख की ठगी

Team The420
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पुणे। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ते साइबर अपराध के बीच महाराष्ट्र के पुणे से ऑनलाइन ठगी का एक और मामला सामने आया है। यहां 57 वर्षीय एक दुकानदार को फर्जी ट्रैफिक चालान के नाम पर भेजे गए एसएमएस के जरिए निशाना बनाया गया। चालान भुगतान के लिए भेजे गए लिंक पर क्लिक करते ही जालसाजों ने उसके मोबाइल फोन का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया और कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से ₹2.76 लाख की रकम निकाल ली।

पीड़ित को जब अपने बैंक खाते से लगातार अनधिकृत ट्रांजेक्शन होने के अलर्ट मिले, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

फर्जी चालान का संदेश बन गया ठगी का जाल

मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित दुकानदार शहर के सदाशिव पेठ इलाके में रहता है। दिसंबर 2025 में उसके मोबाइल फोन पर एक एसएमएस आया, जिसमें खुद को ट्रैफिक विभाग की ओर से भेजा गया चालान नोटिस बताया गया था।

संदेश में लिखा था कि उसके वाहन ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन किया है और उस पर जुर्माना लगाया गया है। साथ ही चालान जमा करने के लिए एक ऑनलाइन लिंक दिया गया था।

यह लिंक देखने में बिल्कुल आधिकारिक वेबसाइट जैसा लग रहा था। संदेश को सही मानते हुए पीड़ित ने चालान का भुगतान करने के उद्देश्य से उस लिंक पर क्लिक कर दिया।

लिंक खुलते ही मोबाइल पर खुला ऑनलाइन फॉर्म

लिंक पर क्लिक करते ही उसके मोबाइल फोन पर एक ऑनलाइन फॉर्म खुल गया, जिसमें चालान भुगतान से जुड़ी कुछ जानकारियां भरने को कहा गया। पीड़ित ने निर्देशों के अनुसार जानकारी दर्ज कर दी।

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इसी दौरान मोबाइल स्क्रीन पर एक अनुमति (परमिशन) का विकल्प दिखाई दिया। पीड़ित ने इसे सामान्य प्रक्रिया समझकर ‘अलाउ’ पर क्लिक कर दिया। इसी के साथ साइबर अपराधियों को उसके मोबाइल फोन तक पहुंच मिल गई।

रिमोट एक्सेस मिलते ही फोन पर बना नियंत्रण

जांच में सामने आया कि फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान पीड़ित के फोन में रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो गया था। जैसे ही उसने अनुमति दी, जालसाजों ने दूर बैठकर उसके मोबाइल का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।

इसके बाद अपराधियों ने मोबाइल में मौजूद विभिन्न एप्लिकेशन और संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बना ली। इस दौरान फोन में सुरक्षित बैंकिंग से जुड़ी जानकारी भी उनके हाथ लग गई।

खाते से कई ट्रांजेक्शन कर निकाली रकम

मोबाइल फोन का नियंत्रण मिलने के बाद जालसाजों ने पीड़ित के बैंक खाते से कई अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए। कुछ ही समय में अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए ₹2.76 लाख की राशि खाते से निकाल ली गई।

जब पीड़ित को बैंक खाते से पैसे निकलने के संदेश मिलने लगे तो उसे संदेह हुआ। उसने तुरंत बैंक से संपर्क कर खाते को सुरक्षित कराने की कोशिश की, लेकिन तब तक बड़ी रकम ट्रांसफर हो चुकी थी।

शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला

घटना के बाद पीड़ित ने साइबर अपराध से संबंधित इकाई से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद मामला संबंधित थाने को भेजा गया, जहां औपचारिक मामला दर्ज कर लिया गया।

फिलहाल तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी में इस्तेमाल किया गया लिंक किस सर्वर से संचालित किया गया और पीड़ित के खाते से निकाली गई रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई।

अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में फर्जी ट्रैफिक चालान, कूरियर डिलीवरी, बिजली बिल और बैंक अलर्ट के नाम पर भेजे जाने वाले संदेशों के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। ऐसे संदेशों में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल फोन में मैलवेयर या रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन इंस्टॉल हो सकता है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। वे फर्जी सरकारी नोटिस, चालान या बैंक अलर्ट भेजकर लोगों को लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे ही व्यक्ति लिंक खोलता है, अपराधी उसके डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं और बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग कर लेते हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और चालान या सरकारी नोटिस से जुड़े मामलों में हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से ही जानकारी की पुष्टि करें।

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