आरबीआई के निर्देश: ट्रांजैक्शन फेल होने पर 5 कार्यदिवस में लौटाना होगा पैसा, देरी होने पर रोज़ाना ₹100 का मुआवजा भी दे सकता है बैंक

ATM से पैसा नहीं निकला, लेकिन खाते से कट गई रकम? जानिए ग्राहक के अधिकार और बैंक के नियम

Team The420
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नई दिल्ली। एटीएम से नकद निकालते समय कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है जब मशीन से पैसा नहीं निकलता, लेकिन बैंक खाते से रकम कट जाती है। यह समस्या अचानक होने पर ग्राहक के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। हालांकि बैंकिंग व्यवस्था में ऐसी घटनाओं के लिए स्पष्ट नियम तय हैं और ग्राहकों को उनका पैसा वापस मिलने का अधिकार है।

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में एटीएम लेनदेन को लेकर सुरक्षा और शिकायत निवारण की व्यवस्था बनाई गई है। यदि किसी ग्राहक के साथ ऐसा होता है कि एटीएम से नकद नहीं निकलता, लेकिन खाते से राशि डेबिट हो जाती है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैंक को जांच कर राशि वापस करनी होती है।

लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी

ऐसी स्थिति में सबसे पहला कदम यह होना चाहिए कि ग्राहक लेनदेन से जुड़ी सभी जानकारी सुरक्षित रखें। इसमें बैंक से प्राप्त एसएमएस या डेबिट अलर्ट, एटीएम मशीन का स्थान, ट्रांजैक्शन की तारीख और समय जैसी जानकारी शामिल होती है।

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यह जानकारी शिकायत दर्ज कराते समय बैंक के लिए जांच में महत्वपूर्ण होती है। यदि एटीएम से स्लिप निकली हो तो उसे भी सुरक्षित रखना बेहतर माना जाता है। कई मामलों में यही विवरण यह साबित करने में मदद करता है कि मशीन से नकद जारी नहीं हुआ था।

तुरंत बैंक को करें सूचना

ग्राहक को घटना के तुरंत बाद अपने बैंक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। शिकायत दर्ज कराने के कई तरीके उपलब्ध होते हैं। ग्राहक बैंक के मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर या निकटतम शाखा के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार 24 से 48 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कर देना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है। इससे बैंक के लिए ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और एटीएम लॉग की जांच करना आसान हो जाता है।

आरबीआई के नियम क्या कहते हैं

एटीएम से नकद न निकलने लेकिन खाते से राशि कटने के मामलों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक का एटीएम ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है और खाते से पैसा डेबिट हो जाता है, तो बैंक को अधिकतम पांच कार्यदिवस के भीतर ग्राहक के खाते में पूरी राशि वापस करनी होती है।

बैंक आमतौर पर एटीएम मशीन के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक जर्नल और नकदी मिलान की प्रक्रिया के माध्यम से यह जांच करते हैं कि मशीन से पैसा वास्तव में निकला था या नहीं। यदि यह पुष्टि हो जाती है कि मशीन से नकद जारी नहीं हुआ, तो बैंक ग्राहक के खाते में रकम वापस जमा कर देता है।

देरी होने पर देना पड़ सकता है मुआवजा

यदि बैंक तय समयसीमा के भीतर ग्राहक के खाते में पैसा वापस नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त मुआवजा देना पड़ सकता है। नियमों के अनुसार देरी होने पर बैंक को प्रति दिन ₹100 के हिसाब से मुआवजा देना पड़ सकता है।

यह मुआवजा तब तक लागू रहता है जब तक ग्राहक के खाते में मूल राशि वापस जमा नहीं हो जाती। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक ऐसी शिकायतों का जल्द निपटारा करें और ग्राहकों को अनावश्यक परेशानी न हो।

जरूरत पड़ने पर आगे की शिकायत भी संभव

यदि बैंक में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो ग्राहक उच्च स्तर पर भी शिकायत कर सकते हैं। बैंकिंग शिकायतों के समाधान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली उपलब्ध कराई है।

इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहक बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

डिजिटल बैंकिंग के दौर में जागरूकता जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल बैंकिंग और एटीएम सेवाओं के व्यापक उपयोग के साथ ग्राहकों के लिए अपने अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। यदि किसी भी एटीएम लेनदेन में गड़बड़ी होती है, तो घबराने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है।

बैंकिंग नियमों के तहत ग्राहकों की सुरक्षा और शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था मौजूद है, इसलिए समय पर शिकायत दर्ज कराने और लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने से पैसा वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

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