गोरखपुर। साइबर ठगी के एक बड़े मामले में बैंक खातों का दुरुपयोग कर पैसा ठगने वाले चार आरोपियों को खोराबार पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, एक पासबुक, एक एटीएम कार्ड और तीन एटीएम स्लिप बरामद किए। आरोपियों ने कुल 16 म्यूल खाते खुलवाए और इनमें से लगभग 98 लाख रुपये का लेनदेन किया गया। शनिवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को टारगेट करते थे। उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खातों के लिए आधार और पैन कार्ड लेने का लालच दिया जाता था। इसके बाद आरोपी आधार कार्ड की मदद से पहले सिम कार्ड जारी करवाते और फिर बैंक में खाता खुलवाकर पासबुक और एटीएम अपने कब्जे में ले लेते थे।
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मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला की शिकायत से खुलासा
12 मार्च को खोराबार थाने में एक महिला ने तहरीर दी कि उसके परिचित शक्ति जायसवाल और उसके साथी शिवम पटवा ने सरकारी योजना के तहत धनराशि और सिलाई मशीन दिलाने का झांसा देकर उसका आधार और पैन कार्ड लिया। इसके बाद सिम कार्ड जारी किया और बैंक खाता खुलवाया। पासबुक और एटीएम कार्ड अपने पास रखकर उन्होंने खाते का दुरुपयोग करते हुए लाखों रुपये का ट्रांजेक्शन किया। महिला के खाते से अब तक लगभग 12 लाख रुपये निकाल लिए गए।
पुलिस ने मामले में जांच करते हुए वंश निषाद, शोभित गौड़, शक्ति जायसवाल और शिवम पटवा को गिरफ्तार किया। पूछताछ में अन्य म्यूल खातों की जानकारी भी मिली। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 3(5) और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत कार्रवाई की गई।
म्यूल खातों और रकम की है जिम्मेदारी
जांच में यह सामने आया कि आरोपियों का मुख्य काम म्यूल खाते खोलकर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाना था। हर खाते और ट्रांजेक्शन पर उन्हें कमीशन मिलता था। अब तक गोरखपुर में 16 खाते उनके द्वारा खुलवाए गए, जिनका इस्तेमाल जालसाजी में हुआ। इन खातों के माध्यम से लगभग 98 लाख रुपये को ट्रांजेक्शन कर ठिकाने लगाया गया। सभी आरोपियों की शैक्षिक योग्यता कॉलेज पासआउट या स्नातक है। गिरोह का नेतृत्व वंश निषाद करता था।
रकम को क्रिप्टो में बदलकर बाहर भेजा जाता था
पुलिस ने बताया कि राशि प्राप्त होने के बाद जालसाज इसे एटीएम के जरिए यूएसडीटी में बदलकर क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे। इससे पैसा आसानी से देश के बाहर भेजा जा सकता था। गिरोह में अलग-अलग जगहों पर बैठे सदस्य पूरी प्रक्रिया—वारदात को अंजाम देने से लेकर रकम को ठिकाने लगाने तक—को अंजाम देते थे।
पुलिस अब इस पूरी नेटवर्क चेन की जांच कर रही है, ताकि अन्य संभावित म्यूल खाते और गिरोह के सदस्यों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि सरकारी योजनाओं के नाम पर इस तरह के झांसे का शिकार न बनें और किसी को आधार या पैन जैसी संवेदनशील जानकारी न दें।
