चंडीगढ़। हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े एक बड़े घोटाले में ज्वैलर राजन कटोदिया, मालिक सवान ज्वैलर्स, को गिरफ्तार किया गया है। इस गिरफ्तारी के साथ इस मामले में कुल गिरफ्तारी संख्या 12 हो गई है। जांच में पता चला कि कथित आरोपियों से जुड़े कंपनियों और फर्मों से ₹250 करोड़ से अधिक की रकम कटोदिया की फर्म में ट्रांसफर की गई थी।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पहले ही खुलासा किया था कि चंडीगढ़ ब्रांच में बैंक कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के माध्यम से सरकारी खातों के जरिए ₹590 करोड़ का घोटाला किया गया था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि कटोदिया ने प्रधान आरोपियों के लिए नकद रूपांतरण की सेवाएं प्रदान की और इसके बदले भारी कमीशन प्राप्त किया।
घोटाले में शामिल आरोपियों ऋभव ऋषि, अभय कुमार, अभिषेक सिंगला और स्वाति सिंगला की फर्मों से कटोदिया की कंपनी को राशि मिली। जांच में यह भी सामने आया कि कटोदिया ने इन फर्मों के खातों में सोने की बिक्री के झूठे लेनदेन दर्ज किए। यह भी बताया गया कि कटोदिया ने इस साजिश की शुरुआत से ही योजना में सक्रिय भूमिका निभाई और अपराध को अंजाम देने में प्रमुख योगदान दिया।
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अधिकारियों ने बताया कि कटोदिया और अन्य आरोपी सरकारी खातों से रकम को अवैध माध्यम से संबंधित कंपनियों और फर्मों में ट्रांसफर कर रहे थे। इसके तहत कंपनियों के माध्यम से राशि को ज्वैलर के खाते में भेजा गया। जांच में यह भी सामने आया कि सवान ज्वैलर्स ने कैप को फिनटेक सर्विसेज, एसआरआर प्लानिंग गुरूज प्रा. लिमिटेड, और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट जैसी फर्मों से राशि प्राप्त की।
पुलिस ने बताया कि इससे पहले इस मामले में 11 अन्य आरोपी गिरफ्तार हो चुके थे, जिनमें छह बैंक कर्मचारी, चार निजी व्यक्ति और एक सरकारी अधिकारी शामिल हैं। अब राजन कटोदिया की गिरफ्तारी के बाद जांच और अधिक गहन हो गई है। आरोपियों को पचंकुला कोर्ट में पेश किया जाएगा और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड मांगी जाएगी।
जांच अधिकारियों का कहना है कि कटोदिया ने इस घोटाले में नकद रूपांतरण और लेनदेन को व्यवस्थित करने में मदद की, जिससे राशि को जल्दी और आसानी से विदेशी लेनदेन में बदला जा सके। जांच टीम इस पूरे नेटवर्क को समझने और अन्य फर्मों तथा आरोपियों की पहचान करने में लगी हुई है।
स्रोतों ने बताया कि बैंक कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के साथ कटोदिया की भूमिका अपराध के सम्पूर्ण साजिश में निर्णायक रही। प्रारंभिक जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने फर्मों के खातों के माध्यम से सोने की बिक्री और नकद लेनदेन की झूठी प्रविष्टियां कीं, ताकि घोटाले की ट्रैकिंग मुश्किल हो सके।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि मामले में कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है और सभी आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनका न्यायिक नियंत्रण सुनिश्चित किया जाएगा। बैंक घोटाले की जांच में अभी और खुलासे होने की संभावना है, जिससे पूरे साजिश का पर्दाफाश होगा।
