नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए इंटरपोल के नेतृत्व में चलाए गए एक वैश्विक अभियान में 45,000 से अधिक संदिग्ध IP एड्रेस और सर्वर बंद कर दिए गए। इस कार्रवाई के दौरान दुनिया भर में 94 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 110 अन्य लोगों की जांच जारी है। अभियान के दौरान विभिन्न देशों में छापेमारी कर 212 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और सर्वर भी जब्त किए गए।
यह कार्रवाई ऑपरेशन सायनेर्जिया (Operation Synergia) के तीसरे चरण के तहत की गई, जो 18 जुलाई 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच संचालित हुआ। इस अभियान में 72 देशों और क्षेत्रों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मिलकर हिस्सा लिया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सक्रिय साइबर अपराध सिंडिकेट्स को कमजोर करना, उभरते खतरों को रोकना और ऑनलाइन ठगी के शिकार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
कई देशों में छापेमारी, बड़े नेटवर्क का खुलासा
जांच के दौरान अलग-अलग देशों में साइबर अपराध के कई नेटवर्क सामने आए। बांग्लादेश में हुई एक कार्रवाई में 40 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और 134 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। इन पर ऑनलाइन लोन और नौकरी के नाम पर ठगी, पहचान चोरी और क्रेडिट कार्ड फ्रॉड जैसे अपराधों में शामिल होने का आरोप है।
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इसी तरह टोगो में अधिकारियों ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया, जो एक रिहायशी इलाके से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। जांच में सामने आया कि गिरोह के कुछ सदस्य सोशल मीडिया खातों को हैक कर लेते थे, जबकि अन्य लोग सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए रोमांस स्कैम और सेक्सटॉर्शन जैसी ठगी को अंजाम देते थे।
सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर रिश्तेदारों से ठगी
जांच एजेंसियों के मुताबिक कई मामलों में अपराधी पहले किसी व्यक्ति के सोशल मीडिया खाते तक अवैध पहुंच बना लेते थे। इसके बाद वे उसी व्यक्ति बनकर उसके ऑनलाइन संपर्कों से बातचीत शुरू करते थे।
अपराधी नकली प्रेम संबंध या भावनात्मक भरोसा बनाकर पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लेते थे। इस तरीके से कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया।
मकाऊ में 33,000 से ज्यादा फिशिंग वेबसाइट का पता
अभियान के दौरान मकाऊ में अधिकारियों ने 33,000 से अधिक फिशिंग और धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों की पहचान की। इनमें से कई वेबसाइटें फर्जी ऑनलाइन कैसीनो के रूप में बनाई गई थीं, जबकि कुछ वेबसाइटें बैंक, सरकारी संस्थानों और भुगतान सेवाओं की नकल कर रही थीं।
इन वेबसाइटों का उद्देश्य लोगों को अपने खातों में पैसा जमा करने या व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी दर्ज करने के लिए प्रेरित करना था, जिसके बाद अपराधी उस जानकारी का दुरुपयोग कर ठगी करते थे।
भारत में भी ट्रांसनेशनल साइबर फ्रॉड पर कार्रवाई
इसी बीच भारत में भी एक बड़े ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस मामले में जांच के तहत दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पंजाब में 15 स्थानों पर छापेमारी की गई।
जांच में सामने आया कि एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं के जरिए लोगों को ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर ऊंचे मुनाफे का झांसा देता था।
सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में पीड़ितों को छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा जाता था और उन्हें नकली वेबसाइटों पर फर्जी मुनाफा दिखाया जाता था। इससे उनका भरोसा जीतने के बाद उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
मनी ट्रेल छिपाने के लिए कई खातों का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ितों से ठगी गई रकम को तुरंत कई म्यूल बैंक खातों के जरिए अलग-अलग जगहों पर ट्रांसफर किया जाता था ताकि मनी ट्रेल को छिपाया जा सके।
इसके बाद यह पैसा विदेशी एटीएम से निकाला जाता था या फिर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन सक्षम डेबिट कार्ड के जरिए विदेशों में इस्तेमाल किया जाता था। कुछ मामलों में रकम को क्रिप्टोकरेंसी में भी बदला गया और फिर विभिन्न डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दिया गया।
जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क से जुड़े अशोक कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया है, जिसे इस सिंडिकेट का प्रमुख सदस्य बताया जा रहा है। इसके अलावा कई बैंक खातों को फ्रीज किया गया है और गिरोह के संचालन से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी जब्त किए गए हैं।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा साइबर अपराध
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट और डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से फैल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के संयुक्त अभियानों से न केवल अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है, बल्कि संभावित पीड़ितों को भी बड़ी ठगी से बचाया जा सकता है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि अभियान के दौरान जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आने वाले समय में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फिलहाल विभिन्न देशों में इस नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों की पहचान और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।
