अमेरिका के दक्षिण फ्लोरिडा क्षेत्र में रियल एस्टेट निवेश से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। भारतीय मूल के रियल एस्टेट कारोबारी ऋषि कपूर पर निवेशकों से जुटाई गई करीब 85 मिलियन डॉलर (लगभग ₹700 करोड़ से अधिक) की राशि का दुरुपयोग करने का आरोप लगा है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि निवेशकों को लग्जरी कॉन्डोमिनियम परियोजनाओं में भारी मुनाफे का भरोसा दिलाकर रकम जुटाई गई, लेकिन बाद में उसी धन का इस्तेमाल निजी ऐशो-आराम और महंगी संपत्तियां खरीदने में किया गया।
करीब 41 वर्षीय ऋषि कपूर के खिलाफ फ्लोरिडा की संघीय अदालत में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें वायर फ्रॉड की साजिश, बैंक धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी, टैक्स रिटर्न दाखिल न करना और अमेरिकी सरकार को धोखा देने की साजिश जैसे अपराध शामिल बताए गए हैं। अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार आरोपी को 6 मार्च को फोर्ट लॉडरडेल के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के विदेश भागने की आशंका है, जिसके बाद उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
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निवेशकों को दिखाए गए लग्जरी कॉन्डो प्रोजेक्ट
जांच के अनुसार आरोपी ने अपनी रियल एस्टेट कंपनी Location Ventures के माध्यम से कई निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई। निवेशकों को बताया गया कि दक्षिण फ्लोरिडा के प्रमुख और महंगे इलाकों में आधुनिक सुविधाओं से लैस लग्जरी कॉन्डोमिनियम परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।
इन परियोजनाओं के लिए Coconut Grove, Miami Beach, Coral Gables और Fort Lauderdale जैसे प्रतिष्ठित इलाकों का जिक्र किया गया। निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया कि इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर उन्हें भारी लाभ मिलेगा और निवेश कई गुना तक बढ़ सकता है।
हालांकि जांच के दौरान सामने आया कि जिन परियोजनाओं का प्रचार किया गया था, उनमें से कई या तो शुरू ही नहीं हुईं या फिर अपेक्षित प्रगति नहीं कर सकीं। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि निर्माण और विकास कार्यों में निवेश करने के बजाय आरोपी ने जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा निजी खर्चों में लगा दिया।
लग्जरी यॉट और आलीशान घर पर खर्च
जांच से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक आरोपी ने निवेशकों की रकम से करीब 68 फुट लंबी एक लग्जरी यॉट खरीदी। इसके अलावा दक्षिण फ्लोरिडा के बेहद महंगे इलाके Cocoplum, Coral Gables में स्थित एक आलीशान घर से जुड़े खर्चों का भुगतान भी कथित रूप से इसी धन से किया गया।
अभियोजन का कहना है कि आरोपी ने निवेशकों और बैंकों को गुमराह करते हुए कई वित्तीय दस्तावेजों में गलत जानकारी दी। आरोप है कि उन्होंने निवेशकों को बताया था कि परियोजनाओं में उन्होंने अपनी ओर से करीब 13 मिलियन डॉलर का निवेश किया है, जबकि वास्तविक निवेश उससे काफी कम पाया गया।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि निवेशकों से मिली रकम को अलग-अलग खातों और खर्चों के माध्यम से निजी उपयोग में लगाया गया, जिससे परियोजनाओं के लिए उपलब्ध पूंजी कम होती चली गई।
कर्मचारियों के टैक्स भी नहीं जमा किए
मामले की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने कर्मचारियों के वेतन से काटे गए पेरोल टैक्स को सरकारी राजस्व विभाग में जमा नहीं कराया। अभियोजन के अनुसार करीब 2 मिलियन डॉलर (लगभग ₹16 करोड़ से अधिक) की टैक्स राशि को जमा करने के बजाय निजी उपयोग में रखा गया।
इसके अलावा आरोप है कि आरोपी ने एस्क्रो एजेंटों को भी गुमराह किया और प्री-कंस्ट्रक्शन कॉन्डोमिनियम के लिए जमा की गई अग्रिम राशि को रिलीज करवाकर उसका इस्तेमाल अन्य खर्चों में किया।
लग्जरी संपत्तियों की जब्ती की तैयारी
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो आरोपी को कई दशकों तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है। अकेले बैंक धोखाधड़ी के मामले में ही अधिकतम 30 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
साथ ही निवेशकों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपी से जुड़ी कई महंगी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। इनमें कथित तौर पर खरीदी गई लग्जरी यॉट, Rolex Daytona घड़ी और एक प्लैटिनम रिंग शामिल बताई जा रही हैं।
पहले भी सामने आ चुका है एक मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब 2024 में भी एक अलग वित्तीय मामले में आरोपी का नाम सामने आया था। उस मामले में अमेरिकी प्रतिभूति नियामक के साथ हुए समझौते के तहत उन्हें निवेशकों को रकम लौटाने पर सहमति देनी पड़ी थी, हालांकि उस समय उन्होंने किसी भी प्रकार की गलती स्वीकार नहीं की थी।
नए आपराधिक मामले में जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं तो यह दक्षिण फ्लोरिडा के रियल एस्टेट निवेश बाजार से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जा सकता है।
