Bim10 टूर्नामेंट से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप; क्रिकेट वेस्टइंडीज और ICC की एंटी-करप्शन संहिता के उल्लंघन का मामला

मैच फिक्सिंग पर सख्ती: ICC ने KKR के पूर्व खिलाड़ी जेवोन सर्ल्स समेत तीन को किया सस्पेंड

Team The420
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नई दिल्ली। क्रिकेट में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने वेस्टइंडीज के ऑलराउंडर जेवोन सर्ल्स समेत तीन लोगों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। सर्ल्स पहले इंडियन प्रीमियर लीग की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए खेल चुके हैं। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार विरोधी नियमों के कथित उल्लंघन और मैच फिक्सिंग से जुड़े आरोपों के बाद की गई है।

आईसीसी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार यह मामला 2023–24 में खेले गए Bim10 टूर्नामेंट से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सर्ल्स के अलावा टीम से जुड़े दो अन्य व्यक्तियों—चित्रंजन राठौड़ और ट्रेवन ग्रिफिथ—पर भी भ्रष्टाचार विरोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। तीनों पर क्रिकेट वेस्टइंडीज की भ्रष्टाचार-रोधी संहिता के कई प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप है।

रिपोर्ट के मुताबिक तीनों को तत्काल प्रभाव से सभी प्रकार की क्रिकेट गतिविधियों से अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। आरोपितों को 11 मार्च 2026 से 14 दिनों के भीतर अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब देने का समय दिया गया है। इस अवधि के दौरान वे किसी भी आधिकारिक क्रिकेट प्रतियोगिता या गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

जारी जानकारी के अनुसार आरोप मुख्य रूप से क्रिकेट वेस्टइंडीज की एंटी-करप्शन संहिता के विभिन्न प्रावधानों से जुड़े हैं। इनमें मैच के नतीजों या खेल की प्रगति को अनुचित तरीके से प्रभावित करने की कोशिश, खिलाड़ियों या टीम स्टाफ को ऐसी गतिविधियों के लिए उकसाना तथा संभावित भ्रष्टाचार मामलों की जांच में सहयोग न करना शामिल है।

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क्रिकेट वेस्टइंडीज की संहिता के अनुच्छेद 2.1.1 के तहत किसी मैच के परिणाम, प्रगति या अन्य पहलू को अनुचित तरीके से प्रभावित करना या ऐसा करने की साजिश का हिस्सा बनना गंभीर अपराध माना जाता है। इसी तरह अनुच्छेद 2.1.4 के अनुसार किसी खिलाड़ी या टीम स्टाफ को भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना, निर्देश देना या सुविधा प्रदान करना भी नियमों का उल्लंघन है।

इसके अलावा अनुच्छेद 2.4.4 के तहत किसी संभावित भ्रष्टाचार मामले की जांच में भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारियों के साथ सहयोग करने से इनकार करना या जरूरी जानकारी छिपाना भी संहिता के खिलाफ माना जाता है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक इन प्रावधानों से जुड़े कई आरोप सर्ल्स और राठौड़ पर लगाए गए हैं।

मामले में शामिल तीसरे व्यक्ति ट्रेवन ग्रिफिथ पर भी कई आरोप लगाए गए हैं। उन पर क्रिकेट वेस्टइंडीज की भ्रष्टाचार-रोधी संहिता के चार उल्लंघनों के अलावा एक आरोप अंतरराष्ट्रीय मैच से जुड़ा बताया गया है, जो आईसीसी की एंटी-करप्शन संहिता के दायरे में आता है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी20 लीग इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का नया सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में फिक्सिंग से जुड़े आरोपों ने क्रिकेट की साख और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

आईसीसी के भ्रष्टाचार-रोधी ढांचे के तहत यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित खिलाड़ियों और अधिकारियों पर लंबी अवधि का प्रतिबंध लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में आजीवन प्रतिबंध तक का प्रावधान है। इसलिए इस मामले की जांच को क्रिकेट प्रशासन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

खेल प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्रिकेट में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए निगरानी तंत्र को काफी मजबूत किया गया है। आधुनिक एंटी-करप्शन इकाइयां खुफिया जानकारी, डिजिटल निगरानी और रिपोर्टिंग तंत्र के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखती हैं।

इसके साथ ही खिलाड़ियों और टीम अधिकारियों को किसी भी संदिग्ध संपर्क या मैच फिक्सिंग से जुड़े प्रस्ताव की जानकारी तुरंत एंटी-करप्शन अधिकारियों को देना अनिवार्य किया गया है। ऐसा न करने पर भी नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित कार्रवाई इसलिए भी जरूरी होती है ताकि खेल की विश्वसनीयता बनी रहे और जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। इसी कारण आरोप सामने आते ही अस्थायी निलंबन जैसे कदम उठाए जाते हैं।

अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई आरोपितों के जवाब और होने वाली अनुशासनात्मक सुनवाई पर निर्भर करेगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि तीनों के खिलाफ अंतिम रूप से क्या कदम उठाए जाएंगे और क्या उन्हें भविष्य में पेशेवर क्रिकेट में वापसी का मौका मिल पाएगा या नहीं।

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