साइबर अपराधियों द्वारा लोगों के बैंक खातों से पैसे निकालकर उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का नया तरीका सामने आया है। इस तरह की ठगी में अपराधी पहले पीड़ित के बैंक खाते तक पहुंच बनाते हैं और फिर निकाली गई राशि को तुरंत क्रिप्टो वॉलेट में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे पैसे को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है।
बैंक खाते तक पहुंच बनाकर की जाती है ठगी
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में वे फर्जी कॉल, लिंक या मैसेज के माध्यम से पीड़ितों को अपने जाल में फंसाते हैं।
एक बार जब उन्हें बैंकिंग ऐप या खाते से जुड़ी जानकारी मिल जाती है, तो वे खाते से पैसे निकालकर उन्हें डिजिटल करेंसी या क्रिप्टो वॉलेट में ट्रांसफर कर देते हैं। इस प्रक्रिया में कई बार अलग-अलग खातों और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल किया जाता है ताकि ट्रांजैक्शन को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
क्रिप्टो ट्रांजैक्शन से जांच होती है मुश्किल
विशेषज्ञों का कहना है कि ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदल देने से जांच एजेंसियों के लिए पैसे का पता लगाना कठिन हो जाता है। कई साइबर अपराधी अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंज या वॉलेट का उपयोग करते हैं, जिससे पैसा तेजी से एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर हो जाता है।
इसी कारण साइबर अपराधों में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इससे अपराधियों को अपनी पहचान छिपाने में मदद मिलती है।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करने और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करने की चेतावनी दी गई है।
अगर किसी को साइबर ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराने और संबंधित बैंक को सूचित करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं, इसलिए डिजिटल सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।
