बरेली। वेशकों और आम निवेशकों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले कैनविज ग्रुप का मामला अब आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को ट्रांसफर किया जाएगा। बरेली पुलिस ने ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू कर दी है और केस की रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है। मंजूरी मिलने के बाद ईओडब्ल्यू पूरे मामले की जांच करेगी।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कन्हैया गुलाटी, एमडी कैनविज ग्रुप, और अन्य अधिकारियों ने विभिन्न निवेश योजनाओं और पोंजी स्कीमों के जरिए हजारों निवेशकों से 800 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाया। निवेशकों को रिटेल स्टोर, रियल एस्टेट और अन्य योजनाओं में मोटा लाभ का झांसा देकर रकम हड़पी गई। शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को रकम लौटाई गई, जिससे विश्वास पैदा हुआ, लेकिन बाद में कंपनी के ठग फरार हो गए।
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बरेली पुलिस के अनुसार, कन्हैया गुलाटी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में कुल 64 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें अयोध्या और कासगंज में एक-एक, शाहजहांपुर में दो, झारखंड के रांची (अर्गोरा थाना) और बिहार के बेरोह (नगर थाना) में एक-एक मुकदमा शामिल है। बाकी मुकदमे बरेली के प्रेमनगर, सुभाषनगर, बारादरी, फरीदपुर, नवाबगंज और फतेहगंज पश्चिमी थाने में दर्ज हैं।
एसपी ट्रैफिक अकमल खान ने बताया कि यदि वित्तीय ठगी की रकम 10 लाख रुपये से अधिक हो और पीड़ितों की संख्या बड़ी हो तो मामला ईओडब्ल्यू को भेजा जाता है। इस प्रकरण में हजारों निवेशक प्रभावित हैं, इसलिए केस ट्रांसफर करने के लिए फाइल मुख्यालय को भेजी गई।
कैनविज ग्रुप की कंपनियों में शामिल हैं:
- कैनविज सेल्स मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड
- कैनविज डेवलपर्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड
- कैनविज कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड
- कुशाग्र हैबिटेट डेवलपर्स, उत्तराखंड
- कैनविज रिसॉर्ट मोटेल्स प्राइवेट लिमिटेड
- कैनविज बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड
- कैनविज इंफ्रा कॉरपोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
- कैनविज इंडस्ट्रीज लिमिटेड
- कैनविज रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड
- कैनविज फाउंडेशन आसरा
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि ग्रुप ने कई कंपनियों और समूहों के नामों का इस्तेमाल करके निवेशकों को अलग-अलग योजनाओं में फंसाया। यह रणनीति ठगों को लंबे समय तक अपने धोखाधड़ी ऑपरेशन को जारी रखने में मदद करती रही।
अधिकारी आगे कहते हैं कि ट्रांसफर के बाद ईओडब्ल्यू विस्तृत जांच करेगी। इसमें सभी कैनविज कंपनियों, अधिकारियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की गतिविधियों की समीक्षा शामिल होगी। निवेशकों के वित्तीय लेन‑देन, बैंक खाते और निवेश दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी ताकि पूरी रकम का ऑडिट और रिकवरी सुनिश्चित की जा सके।
इस मामले से स्पष्ट संदेश जाता है कि पोंजी स्कीम और निवेश के नाम पर ठगी करने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने निवेशकों से कहा कि किसी भी संदिग्ध निवेश या चिटफंड योजना में शामिल होने से पहले पूरी तरह जांच करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर वित्तीय ठगी के मामलों में तत्काल ट्रांसफर और ईओडब्ल्यू की जांच निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि करोड़ों रुपये की ठगी में दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़े।
