शहर में दर्ज 74 साइबर फ्रॉड मामलों की जांच में खुला नेटवर्क; देशभर में फैले गिरोह के खिलाफ समन्वित अभियान में कई राज्यों में एक साथ छापेमारी

“ऑपरेशन ऑक्टोपस” का देशव्यापी शिकंजा: हैदराबाद से जुड़े साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, 16 राज्यों से 117 आरोपी गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

हैदराबाद। देशभर में फैले साइबर ठगी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसियों ने समन्वित अभियान के तहत 16 राज्यों से 117 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई “ऑपरेशन ऑक्टोपस” नाम से चलाए गए विशेष अभियान के दौरान की गई, जिसका संबंध हैदराबाद में दर्ज दर्जनों साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद में दर्ज 74 अलग-अलग साइबर ठगी मामलों की पड़ताल के दौरान देशव्यापी नेटवर्क का खुलासा हुआ था। इसके बाद कई राज्यों में एक साथ छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में बैठकर ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क को संचालित कर रहे थे और बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट तथा फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर पैसों को तेजी से इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

सूत्रों के मुताबिक इस अभियान में स्थानीय स्तर पर तकनीकी टीमों और कानून-व्यवस्था से जुड़े दलों को भी शामिल किया गया था, ताकि डिजिटल सबूतों को तुरंत सुरक्षित किया जा सके और संदिग्ध खातों पर समय रहते रोक लगाई जा सके। छापेमारी के दौरान कई संदिग्ध बैंक खाते, मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और डिजिटल दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।

बहु-राज्यीय नेटवर्क का खुलासा

जांच के दौरान यह सामने आया कि साइबर अपराधी अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे समूहों में काम कर रहे थे। कुछ आरोपी फर्जी बैंक खाते खोलने और उन्हें किराये पर देने का काम करते थे, जबकि अन्य सदस्य कॉलिंग, सोशल मीडिया और ऑनलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को झांसा देने में लगे रहते थे।

जांचकर्ताओं के मुताबिक गिरोह के कुछ सदस्य खुद को बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करते थे। कई मामलों में निवेश, ऑनलाइन लोन, केवाईसी अपडेट और डिजिटल भुगतान से जुड़ी सेवाओं के नाम पर लोगों को फंसाया जाता था।

पड़ताल में यह भी पता चला कि ठगी से प्राप्त रकम को तुरंत कई बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर भेज दिया जाता था, जिससे पैसे का स्रोत ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। इसके लिए गिरोह ने बड़ी संख्या में फर्जी या किराये के बैंक खातों का इस्तेमाल किया।

डिजिटल सबूतों की जांच जारी

जांच एजेंसियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई और राज्यों में सक्रिय नेटवर्क के बारे में सुराग मिले हैं। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधी अब पहले की तुलना में कहीं अधिक संगठित तरीके से काम कर रहे हैं और वे अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क का इस्तेमाल कर जांच को जटिल बना देते हैं।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग के साथ-साथ बहु-स्तरीय बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक राज्य में कॉलिंग, दूसरे में बैंक खाते और तीसरे में तकनीकी संचालन जैसे मॉडल से काम किया जाता है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।”

आगे भी जारी रहेगा अभियान

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि “ऑपरेशन ऑक्टोपस” अभी समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी कार्रवाई की संभावना है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के नेटवर्क को खत्म करने के लिए कई एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है, क्योंकि साइबर अपराध भौगोलिक सीमाओं से परे काम करता है।

विशेषज्ञों ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। अज्ञात कॉल, लिंक या निवेश प्रस्तावों पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी है, क्योंकि ज्यादातर साइबर ठगी मामलों में अपराधी लोगों को जल्दबाजी या लालच में फंसाकर ही जाल बिछाते हैं।

जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article