नई दिल्ली। बहु-करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले से जुड़े मामले में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने दिल्ली के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। संस्था की अनुशासन समिति ने आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट परमिंदर सिंह ओबेरॉय को एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया है और उस पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया है।
मामला उस समय सामने आया जब एक केंद्रीय जांच एजेंसी ने शिकायत दर्ज कराई कि ओबेरॉय ने एक कंपनी के फर्जी वित्तीय दस्तावेज और बैलेंस शीट का ऑडिट कर उन्हें प्रमाणित किया, जिनका इस्तेमाल बाद में बैंक से करोड़ों रुपये का लोन हासिल करने के लिए किया गया।
फर्जी वित्तीय दस्तावेज से हासिल किया गया बैंक लोन
जांच के अनुसार, आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट ने M/s White Metals नाम की कंपनी के वित्तीय वर्ष 2009-10 से 2011-12 तक के वित्तीय दस्तावेजों का ऑडिट किया और उन्हें प्रमाणित किया। इसके अलावा उसने M/s White Metals और M/s White Tiger Steels Pvt. Ltd. के लिए अस्थायी बैलेंस शीट भी तैयार कर प्रमाणित की।
बताया गया कि इन दस्तावेजों के आधार पर M/s White Tiger Steels Pvt. Ltd. ने एक सरकारी बैंक की शाखा से ₹10 करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट हासिल कर ली। जांच में बाद में पता चला कि जिन दस्तावेजों के आधार पर यह लोन लिया गया, उनमें कई वित्तीय आंकड़े गलत और मनगढ़ंत थे।
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जांच में सामने आई चौंकाने वाली बातें
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि M/s White Metals वास्तव में कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं कर रही थी। कंपनी का VAT/TIN नंबर भी 31 मार्च 2007 से पूर्व प्रभाव से रद्द किया जा चुका था।
इसके बावजूद कंपनी के नाम पर दाखिल किए गए वैट रिटर्न और टर्नओवर के आंकड़े प्रमाणित किए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार यह प्रमाणन पूरी तरह फर्जी वित्तीय जानकारी पर आधारित था।
पेशेवर आचरण के नियमों का उल्लंघन
मामले की सुनवाई के दौरान अनुशासन समिति ने यह जांच की कि क्या संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक्ट, 1949 के तहत निर्धारित पेशेवर आचरण के नियमों का उल्लंघन किया है।
जांच में पाया गया कि उन्होंने वित्तीय दस्तावेजों को प्रमाणित करते समय पर्याप्त जांच-पड़ताल नहीं की और आवश्यक दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं की।
समिति ने यह भी पाया कि उन्होंने ऑडिटिंग मानकों का पालन नहीं किया और केवल कंपनी प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर दस्तावेज प्रमाणित कर दिए।
कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाए
अनुशासन समिति के समक्ष सुनवाई के दौरान आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट को कई बार मौका दिया गया कि वे अपने बचाव में बैंक स्टेटमेंट, वैट रिटर्न या ऑडिट से जुड़े वर्किंग पेपर जैसे दस्तावेज प्रस्तुत करें।
हालांकि, समिति के अनुसार वह इनमें से कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाए जिससे यह साबित हो सके कि उनके द्वारा प्रमाणित किए गए वित्तीय आंकड़े सही थे।
रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान उन्हें कई बार तिथि दी गई, लेकिन वे अंतिम सुनवाई में भी उपस्थित नहीं हुए।
समिति का फैसला
अनुशासन समिति ने अपने आदेश में कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट की लापरवाही और पेशेवर नियमों के उल्लंघन के कारण बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
समिति ने उन्हें पेशेवर कदाचार का दोषी ठहराते हुए उनका नाम एक वर्ष के लिए सदस्यता रजिस्टर से हटाने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन पर ₹1,00,000 का आर्थिक दंड भी लगाया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पेशेवर संस्थाओं की जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि वित्तीय दस्तावेजों का सत्यापन करते समय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है और किसी भी तरह की लापरवाही बड़े आर्थिक अपराधों को जन्म दे सकती है।
