पटना। बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) के उप महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट) पंकज कुमार के तीन ठिकानों पर गुरुवार को विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने लगभग दस घंटे तक छापेमारी की। इस दौरान डीजीएम के कदमकुआं स्थित आवास से 1.31 करोड़ रुपये मूल्य के सोने, चांदी और हीरे के आभूषण तथा 32 लाख रुपये नकद जब्त किए गए।
जांच टीम के मुताबिक, पंकज कुमार ने छापेमारी देख कर खिड़की से आभूषण और नकदी बाहर फेंकने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने इसे समय रहते रोक लिया। इसके बाद डीजीएम के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई।
एसवीयू ने अदालत से अनुमति लेकर उप महाप्रबंधक के तीन ठिकानों — कंकड़बाग के पृथ्वीपुर स्थित शिवम अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या 305 और 405 तथा कदमकुआं के कोनिका मैहर अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या 105 — पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान डीजीएम की सेवाकाल में खरीदी गई 150 से अधिक गहनों की रसीदें भी बरामद हुईं।
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एसवीयू अधिकारियों ने बताया कि डीजीएम और उनकी पत्नी के नाम कई अचल संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। वित्तीय संस्थानों में निवेश संबंधित दस्तावेज और बैंक खातों की भी पड़ताल जारी है। डीजीएम ने स्वीकार किया कि बरामद 32 लाख रुपये नकद और 1.31 करोड़ रुपये मूल्य के आभूषण उनकी ही संपत्ति है।
जांच में यह भी सामने आया कि डीजीएम की संपत्ति केवल पटना तक सीमित नहीं है। नोएडा में भी उनके नाम दो संपत्तियों का पता चला है — एक फ्लैट और एक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स। इनकी पड़ताल की जा रही है। इसके अलावा उनके नाम पर बैंक खातों में पड़ी रकम और लॉकरों की जांच भी की जाएगी। म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश दस्तावेजों का विश्लेषण भी चल रहा है।
एसवीयू ने बताया कि डीजीएम संविदा पर बहाल थे और फिलहाल उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। लेकिन आवश्यकतानुसार पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
छापेमारी टीम का नेतृत्व चार डीएसपी — सुधीर कुमार, संजय वर्मा, चंद्रभूषण और ए. के. झा — ने किया। टीम ने बताया कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार डीजीएम के पास आय से अधिक संपत्ति लगभग 96 लाख रुपये थी, लेकिन जांच के दौरान यह राशि बढ़ने की संभावना है।
एसवीयू के सूत्रों के अनुसार, पंकज कुमार के खिलाफ प्राथमिकी बुधवार को दर्ज कराई गई थी और गुरुवार सुबह छह बजे से न्यायालय से वारंट लेकर छापेमारी शुरू की गई।
जांच के दौरान डीजीएम के पटना और नोएडा के ठिकानों में मिले दस्तावेजों और रसीदों की गहन पड़ताल की जा रही है। बैंक खातों, लॉकरों और निवेश फाइलों की जांच से यह पता लगाया जाएगा कि संपत्ति का स्रोत कानूनी है या आय से अधिक संपत्ति के दायरे में आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आय से अधिक संपत्ति रखने के मामलों में इस तरह की जांच लगातार बढ़ रही है और डिजिटल फाइनेंशियल रिकॉर्ड के माध्यम से अनियमितताओं का पता जल्दी लगाया जा सकता है।
एसवीयू का उद्देश्य न केवल संपत्ति जब्त करना है बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की अनियमितता और आय से अधिक संपत्ति रखने की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई हो। अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच के दौरान आवश्यकतानुसार पंकज कुमार से पुनः पूछताछ की जा सकती है।
पटना और नोएडा में संपत्ति, बैंक खाते और लॉकरों की जांच के साथ ही म्यूचुअल फंड और निवेश दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। इस व्यापक जांच से यह स्पष्ट किया जाएगा कि डीजीएम की संपत्ति वैध है या नहीं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसवीयू ने कहा कि पूरी जांच निष्पक्ष और कड़ी निगरानी के तहत की जा रही है।
