लखनऊ। पुलिस ने कमोडिटी ट्रेडिंग में मोटे लाभ का झांसा देकर करीब 2.10 करोड़ रुपये ठगने वाले दो साइबर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान चुंगा खां और सलमान रहमानी के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों ने गरीबों और वरिष्ठ नागरिकों को अपने जाल में फंसाया और उनके आधार, पैन कार्ड व बैंक खातों का फर्जी इस्तेमाल कर ठगी की।
घटना की शुरुआत गोमतीनगर के वास्तुखंड निवासी वृद्ध आशीष तिवारी के साथ हुई। पुलिस के अनुसार, तिवारी ने दिसंबर 2025 में फेसबुक पर कमोडिटी ट्रेडिंग का विज्ञापन देखा। एक महिला ने उनसे संपर्क किया और ट्रेडिंग में 10 गुना मुनाफे का झांसा दिया। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप “एच-10 फ्रेंडशिप लिवसलांग” में जोड़ा गया। 26 दिसंबर के बीच तिवारी से नौ अलग-अलग ट्रांजैक्शनों के माध्यम से कुल 2,10,39,967 रुपये उड़ा लिए गए।
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इसी तरह रायबरेली रोड, एल्डिको सेक्टर-3 में रहने वाले 65 वर्षीय राजीव कुमार भटनागर को दो बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी का हवाला देकर 70,03,618 रुपये ठगे गए। पुलिस ने बताया कि छह नवंबर को भटनागर के पास एक महिला का फोन आया। महिला ने दावा किया कि उनके और उनकी पत्नी शालिनी भटनागर के नाम पर दो पॉलिसी हैं, जिनकी मैच्यूरिटी पूरी हो चुकी है। भुगतान के नाम पर भटनागर ने रकम भेज दी, जो जालसाजों ने हड़प ली।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी फर्म का सहारा लेकर 1.75 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी भी की थी। फर्म का उपयोग निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर ग्राहकों को फंसाने के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि जालसाज आधार और पैन कार्ड की डिटेल लेकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और बैंक ट्रांजैक्शन को फर्जी तरीके से संपन्न कर रहे थे।
पुलिस उपायुक्त पूर्वी, शशांक सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गाजीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। इंस्पेक्टर राजेश मौर्या ने बताया कि आरोपियों के पास से कंप्यूटर, मोबाइल और फर्जी दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच साइबर सेल करेगी।
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत ठगी तक सीमित नहीं है। आरोपियों द्वारा बनाई गई फर्जी फर्म और ऑनलाइन व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कई लोगों को फंसाने की पूरी योजना सामने आई है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसे जालसाजों के खिलाफ साइबर और वित्तीय नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने यह भी कहा कि पीड़ितों के बैंक खातों और लेन-देन का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरी रकम की रिकवरी और अन्य संभावित ठगी के मामलों का पता लगाया जा सके। साइबर अपराध विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन निवेश मंचों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों और आम लोगों को निशाना बनाना बढ़ता जा रहा है। ऐसे मामलों में जागरूकता और बैंक लेन-देन की नियमित जांच अत्यंत जरूरी है।
पुलिस ने आगे कहा कि मामले में फर्जी फर्म बनाने वाले अन्य लोगों की भी पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दोनों को न्यायालय में पेश किया गया है।
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि साइबर ठगी और फर्जी निवेश फर्मों पर कानून सख्ती से कार्रवाई करता है, और नागरिकों को ऐसे झांसे में नहीं आने देना चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से आग्रह किया है कि ऑनलाइन निवेश और कमोडिटी ट्रेडिंग में हमेशा सावधानी बरतें और किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव में तुरंत पुलिस या वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।
