फर्जी कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बनकर साइबर ठग ने 4G से 5G SIM अपग्रेड कराने के नाम पर पीड़ित का मोबाइल नंबर अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग करते हुए दो दिनों में करीब ₹24 लाख विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मंगलुरु: कर्नाटक के मंगलुरु में 43 वर्षीय एक व्यक्ति 4G से 5G SIM अपग्रेड के नाम पर की गई साइबर ठगी का शिकार हो गया। आरोप है कि मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बनकर साइबर अपराधी ने पहले पीड़ित का भरोसा जीता और फिर उसके मोबाइल नंबर पर नियंत्रण हासिल कर बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से करीब ₹24 लाख की धोखाधड़ी कर ली। मामले में CEN क्राइम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित को 8 जुलाई को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उसका 4G SIM अब 5G नेटवर्क के लिए अपग्रेड किया जाना आवश्यक है। बातचीत के दौरान आरोपी ने पीड़ित की कुछ व्यक्तिगत जानकारियां भी साझा कीं, जिससे उसे कॉल पर भरोसा हो गया।
इसके बाद आरोपी ने बताया कि अपग्रेड प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसके Gmail पर एक अनुरोध भेजा जाएगा, जिसे स्वीकार करना होगा। उसने यह भी कहा कि प्रक्रिया के दौरान कुछ घंटों के लिए मोबाइल नेटवर्क बंद रहेगा और यह सामान्य बात है। आरोपी के कहने पर पीड़ित ने ईमेल पर आए सभी अनुरोध स्वीकार कर लिए।
कुछ ही देर बाद उसका SIM पूरी तरह निष्क्रिय हो गया। कई घंटे तक नेटवर्क वापस नहीं आने पर पीड़ित ने दूसरे मोबाइल नंबर से कॉल करने वाले से संपर्क किया। आरोपी हर बार सर्वर संबंधी तकनीकी समस्या का हवाला देकर सेवा जल्द बहाल होने का आश्वासन देता रहा। 9 जुलाई की शाम तक भी SIM सक्रिय नहीं हुआ तो पीड़ित को संदेह हुआ।
इसके बाद वह मोबाइल सेवा प्रदाता के स्थानीय सेवा केंद्र पहुंचा, जहां कर्मचारियों ने बताया कि कंपनी इस तरह फोन कर SIM अपग्रेड नहीं कराती और न ही ग्राहकों से ईमेल पर आए अनुरोध स्वीकार करने के लिए कहती है। इसके बाद पीड़ित ने तुरंत निष्क्रिय SIM को फोन से निकाल दिया और अपने बैंक से संपर्क किया।
बैंक में जानकारी लेने पर पता चला कि उसके खाते से ₹3 लाख ट्रांसफर किए जा चुके हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पीड़ित के एक क्रेडिट कार्ड के जरिए ₹9 लाख का तत्काल लोन भी ले लिया था। यह राशि पहले पीड़ित के बैंक खाते में जमा की गई और फिर अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
इसके अलावा आरोपी ने तीन अलग-अलग क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर क्रमशः ₹4.10 लाख, ₹3 लाख और ₹5 लाख की अतिरिक्त निकासी भी कर ली। इस तरह 8 और 9 जुलाई के बीच बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से कुल ₹23,98,138 की अनधिकृत निकासी की गई। मोबाइल नंबर अपराधियों के नियंत्रण में होने के कारण बैंक से भेजे गए OTP और अन्य अलर्ट भी पीड़ित तक नहीं पहुंच सके।
मामले की जांच कर रही पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चोरी की गई राशि किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई और इस साइबर ठगी में कितने लोग शामिल थे। प्रारंभिक जांच में इसे सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी का मामला माना जा रहा है।
