नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुग्राम स्थित 32nd Avenue Group से जुड़े कथित ₹500 करोड़ के पोंजी फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत समूह की ₹71.60 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को अटैच किया है। ED के मुताबिक, जांच में निवेशकों को कमर्शियल यूनिट खरीदने के बदले लंबे समय की सुनिश्चित लीज, तय किराये की आय, बायबैक व्यवस्था और समय-समय पर रिटर्न बढ़ाने का भरोसा देकर निवेश कराने का एक संगठित और सुनियोजित तरीका सामने आया है।
ED ने बताया कि जांच दिल्ली पुलिस और गुरुग्राम पुलिस की ओर से दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू की गई थी। इन मामलों में 32nd Avenue Group, उसके प्रमोटर-डायरेक्टर अनभव शर्मा, ध्रुव शर्मा और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और साजिश समेत कई आरोप लगाए गए थे। केंद्रीय एजेंसी ने इन्हीं मामलों से जुड़े कथित अपराध की रकम की जांच करते हुए संपत्तियों को अटैच किया है।
जांच के दौरान ED को कथित तौर पर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किए गए एक संगठित तरीके का पता चला। एजेंसी के अनुसार, निवेशकों को कमर्शियल यूनिट खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता था और बदले में लंबी अवधि की सुनिश्चित लीज, नियमित किराये की आय, बायबैक और समय-समय पर रिटर्न बढ़ाने जैसे वादे किए जाते थे। कई मामलों में निवेशकों को संपत्ति का कब्जा नहीं दिया गया या बाद में उनसे कब्जा वापस ले लिया गया।
ED का दावा है कि एक ही कमर्शियल स्पेस को कई लोगों को बेचने या लीज पर देने के मामले भी सामने आए। कथित तौर पर यूनिट नंबर, क्षेत्रफल और लेआउट में बदलाव कर एक ही संपत्ति के संबंध में अलग-अलग लेनदेन किए गए। जांच एजेंसी के मुताबिक, मूल यूनिटों को छोटे हिस्सों में बांटा गया और इन हिस्सों को तीसरे पक्ष को ट्रांसफर करने के लिए कथित तौर पर फर्जी और तैयार किए गए sale तथा conveyance documents का इस्तेमाल किया गया।
निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए कथित तौर पर कुछ समय तक किराये का भुगतान भी किया गया। ED के अनुसार, बाद में ये भुगतान बंद कर दिए गए, जबकि संबंधित संपत्तियों पर समूह का नियंत्रण बना रहा। एजेंसी ने कुछ मामलों में किराये की रकम पर Tax Deducted at Source (TDS) काटे जाने लेकिन उसे Income Tax Department में जमा नहीं किए जाने का भी दावा किया है।
जांच में कथित फंड लेयरिंग का नेटवर्क भी सामने आया। ED के मुताबिक, निवेशकों से जुटाई गई रकम को 50 से अधिक कंपनियों और Limited Liability Partnerships (LLPs) के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर और लेयर किया गया। एजेंसी ने दावा किया कि इनमें से कई कंपनियां एक ही या गैर-कार्यरत पतों पर पंजीकृत मिलीं और कथित तौर पर फंड की आवाजाही को छिपाने के लिए इस्तेमाल की गईं।
ED ने यह भी कहा कि 32nd Avenue और उससे जुड़े प्रोजेक्ट्स की संपत्तियों की बिक्री से हासिल रकम के इस्तेमाल की कड़ियां गोवा और महाराष्ट्र में संपत्तियां खरीदने तक मिली हैं। एजेंसी के अनुसार, इस कार्रवाई में कुल 76 अचल संपत्तियां अटैच की गई हैं। इनमें गुरुग्राम की कमर्शियल यूनिटों के अलावा गोवा और महाराष्ट्र में जमीन तथा अन्य संपत्तियां शामिल हैं।
इसके अलावा 38 चल संपत्तियों को भी अटैच किया गया है। इनमें कई बैंक खातों में मौजूद रकम और एक inland vessel शामिल है। ED के मुताबिक, इन संपत्तियों की पहचान कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े फंड और गतिविधियों की जांच के दौरान हुई।
इससे पहले ED ने 13 और 14 अप्रैल को दिल्ली-NCR, गोवा, जयपुर और मुंबई में 32nd Avenue Group से जुड़े सात परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। एजेंसी ने तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर निवेशकों से जुटाई गई रकम की कथित आवाजाही और उससे खरीदी गई संपत्तियों की जांच आगे बढ़ाई।
मामले के प्रमुख आरोपी अनभव शर्मा, ध्रुव शर्मा, ममता शर्मा और शिरीन शर्मा फिलहाल मूल आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। ED की ताजा कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस कथित पोंजी नेटवर्क के जरिए जुटाई गई रकम, विभिन्न कंपनियों के माध्यम से उसकी लेयरिंग और उससे खरीदी गई संपत्तियों पर है। हालांकि, एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप जांच के निष्कर्ष हैं और मामले में आरोपियों की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम पर निर्भर करेगी।
