रांची के मॉल ऑफ रांची में ‘शुभ यात्रा ट्रैवल्स’ के नाम से चला रहे थे कारोबार, फॉर्च्यूनर, आई-टेन, फ्रॉन्क्स और बिना नंबर की बलेनो समेत चार कारें बरामद; छह मोबाइल भी जब्त

फर्जी ट्रैवल कंपनी बनाकर किराये पर लेते थे महंगी गाड़ियां, फिर बंधक रखकर वसूलते थे मोटी रकम; तीन गिरफ्तार

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By Roopa
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रांची। झारखंड में फर्जी ट्रैवल कंपनी की आड़ में चारपहिया वाहन हासिल कर उन्हें दूसरे लोगों के पास बंधक रखकर मोटी रकम वसूलने वाले गिरोह का ओरमांझी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य अधिक किराया देने का लालच देकर वाहन मालिकों से उनकी गाड़ियां लेते थे। शुरुआत में दो से तीन महीने तक नियमित किराया देकर उनका भरोसा जीतते थे। इसके बाद उन्हीं गाड़ियों को दूसरे लोगों के पास बंधक रखकर मोटी रकम वसूल लेते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार कार और छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विश्वजीत कुमार सिंह उर्फ विक्की (35), मनोज कुमार (36) और ज्योति कुमारी उर्फ बेबी (34) के रूप में हुई है।

मॉल ऑफ रांची में खोल रखी थी फर्जी ट्रैवल कंपनी

पुलिस के अनुसार, आरोपी रातू रोड स्थित मॉल ऑफ रांची में ‘शुभ यात्रा ट्रैवल्स’ के नाम से कंपनी संचालित कर रहे थे। इसी कंपनी की आड़ में वाहन मालिकों को अधिक किराया देने का भरोसा दिलाकर उनकी गाड़ियां हासिल की जाती थीं। शुरुआत में किराये का भुगतान नियमित रूप से किया जाता था, ताकि वाहन मालिकों को किसी तरह का संदेह न हो। दो-तीन महीने तक किराया मिलने के बाद गिरोह के सदस्य गाड़ियों को दूसरे लोगों के पास बंधक रख देते थे और बदले में मोटी रकम वसूलते थे।

इस तरीके से वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था और उनकी गाड़ियां भी उनके नियंत्रण से बाहर हो जाती थीं। मामले में हरचंडा निवासी सनी कुमार ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाते हुए कार्रवाई की।

फॉर्च्यूनर समेत चार कारें और छह मोबाइल बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने चार चारपहिया वाहन बरामद किए हैं। इनमें टोयोटा फॉर्च्यूनर, हुंडई आई-टेन, मारुति फ्रॉन्क्स और बिना नंबर प्लेट की बलेनो शामिल हैं। इसके अलावा छह मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस बरामद वाहनों के स्वामित्व, उनके वास्तविक मालिकों और उन्हें किन परिस्थितियों में आरोपियों तक पहुंचाया गया, इसकी जांच कर रही है।

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि गिरोह ने अब तक कितने वाहन मालिकों को अपने जाल में फंसाया और कितनी गाड़ियों को दूसरे लोगों के पास बंधक रखा। पुलिस बरामद मोबाइल फोन की भी जांच कर सकती है, ताकि आरोपियों के संपर्कों और कथित लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सके।

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दो आरोपी पहले भी जा चुके हैं जेल

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में शामिल विश्वजीत कुमार सिंह और मनोज कुमार का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है। विश्वजीत के खिलाफ मुंगेर, नामकुम, कांके और ओरमांझी थानों में कई मामले दर्ज हैं। वह पहले भी जेल जा चुका है। वहीं, मनोज कुमार के खिलाफ मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर थाने में उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। वह भी पूर्व में जेल जा चुका है।

पुलिस अब आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के साथ उनके कथित नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी ट्रैवल कंपनी के संचालन में और कौन लोग शामिल थे तथा वाहन बंधक रखने के इस तरीके से कितने लोगों को निशाना बनाया गया।

दो अन्य पीड़ितों ने भी पुलिस से लगाई गुहार

इस मामले में अन्य पीड़ितों के सामने आने के बाद गिरोह की गतिविधियों का दायरा बढ़ने की आशंका है। रामगढ़ निवासी संतोष कुमार और मृणालक्रांति मजुमदार ने रातू थाने में आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने और अपने वाहन वापस दिलाने की मांग की है। दोनों ने पुलिस से शिकायत पर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

पुलिस इन आवेदनों के आधार पर भी मामले की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और वाहनों की तलाश जारी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपियों ने कितने वाहन किराये पर लेने के बाद बंधक रखे और इस कथित धोखाधड़ी से कितनी रकम जुटाई। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ तथा बरामद दस्तावेजों और मोबाइल फोन की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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