बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में श्री गुरु राघवेंद्र सहकारा बैंक नियमिता से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में एक नया मामला सामने आया है। बैंक से जुड़े बिल्डरों और तत्कालीन अधिकारियों पर ऐसे 127 आवासीय प्लॉट गिरवी रखकर भारी-भरकम कर्ज लेने का आरोप है, जिन्हें पहले ही आम लोगों को बेचा जा चुका था। इन संपत्तियों पर बकाया कर्ज और ब्याज की कुल राशि बढ़कर 961 करोड़ रुपये पहुंच गई है। मामले के सामने आने के बाद उन 127 परिवारों के सामने अपने मकान और जमीन के मालिकाना हक को लेकर संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने वर्षों पहले अपनी जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदे थे।
यह मामला बेंगलुरु के केंगेरी होबली स्थित कंबीपुरा गांव के श्री शंकर लेआउट का है। इस लेआउट को बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) से मंजूरी मिली हुई है। यहां के 127 आवासीय प्लॉट अलग-अलग खरीदारों को बेचे गए थे। दस्तावेजों के मुताबिक, बिल्डरों ने वर्ष 2011 से 2015 के बीच इन सभी खरीदारों के पक्ष में विधिवत बिक्री विलेख (सेल डीड) निष्पादित किए थे। इसके बावजूद बाद में इन्हीं संपत्तियों को बैंक के पास गिरवी रखकर करोड़ों रुपये का कर्ज लेने का मामला सामने आया है।
लेआउट में पंजीकृत रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन भी है। एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि उन्हें हाल ही में पता चला कि उनके नाम पर खरीदे गए प्लॉट बैंक के पास गिरवी रखे गए हैं। इसके बाद एसोसिएशन ने 16 जुलाई 2026 को बैंक के प्रशासक को पत्र लिखकर पूरे मामले पर आपत्ति जताई।
2019 में गिरवी रखे गए पहले से बिके प्लॉट
एसोसिएशन ने अपने पत्र में बताया कि 31 अक्टूबर 2019 को पंजीकृत दो मॉर्गेज डीड और 28 नवंबर 2019 को पंजीकृत दो संशोधन विलेखों के माध्यम से पूरे लेआउट की जमीन और उस पर बने आवासीय प्लॉट बैंक के पास बंधक दिखाए गए थे। उस समय बैंक की ओर से तत्कालीन मुख्य सलाहकार एम. वासुदेव मैया का नाम भी इन दस्तावेजों में सामने आया है।
एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि जब 127 प्लॉट के बिक्री विलेख कई वर्ष पहले ही खरीदारों के पक्ष में निष्पादित हो चुके थे तो बैंक ने उन्हें कर्ज के बदले जमानत के रूप में कैसे स्वीकार कर लिया। एसोसिएशन ने इसे बिल्डरों की ओर से आपराधिक विश्वासघात का मामला बताते हुए तत्कालीन बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत की आशंका भी जताई है।
एसोसिएशन ने बैंक प्रशासन से अनुरोध किया है कि खरीदारों के हितों और संपत्तियों पर उनके अधिकारों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई कार्रवाई नहीं की जाए। खरीदारों का कहना है कि उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन खरीदी और वर्षों से अपने प्लॉट पर मालिकाना हक रखते हैं। ऐसे में बिल्डरों के कर्ज की वसूली के लिए उनकी संपत्तियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
₹739 करोड़ का कर्ज, ब्याज सहित ₹961 करोड़ बकाया
जनवरी 2026 में बैंक की ओर से लेआउट के डेवलपर्स को जारी नोटिस में बताया गया था कि संबंधित संपत्तियों को गिरवी रखकर विभिन्न लोगों के नाम पर कुल 739 करोड़ 87 लाख रुपये का कर्ज लिया गया था। ब्याज जुड़ने के बाद यह बकाया बढ़कर 961 करोड़ रुपये हो गया।
हालांकि, बैंक के अधिकारियों के मुताबिक, गिरवी रखी गई संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य का सटीक आकलन उपलब्ध नहीं है। बैंक के पास शहर के अलग-अलग हिस्सों में फैली लगभग 45 से 50 एकड़ जमीन गिरवी होने की जानकारी है। इनमें सबसे दूर स्थित संपत्ति कोलार जिले के चिंतामणि में बताई गई है।
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रोलओवर खातों के जरिये कर्ज बांटने का आरोप
बैंक के कुछ अधिकारियों ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि संपत्तियों को गिरवी रखकर दिए गए 10 से 15 कर्ज मामलों में कथित तौर पर अनसिक्योर्ड लोन को संपत्ति के बदले दिए गए सुरक्षित कर्ज के साथ जोड़ दिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, इन खातों को रोलओवर अकाउंट कहा जा रहा है। आरोप है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल बैंक के ऑडिट में सामने आने वाली कमियों को छिपाने के लिए किया गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वास्तविक कर्ज लेने वाले व्यक्ति को 10 से 12 करोड़ रुपये दिए जाते थे, जबकि शेष रकम दूसरे व्यक्तियों तक पहुंचाई जाती थी। श्री शंकर लेआउट के डेवलपर्स से जुड़े मामले में मूल कर्ज लेने वालों के अलावा 23 अन्य लोगों को भी रकम दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें अलग-अलग व्यक्ति और कंपनियां शामिल हैं।
बैंक ने खरीदारों से मांगे दस्तावेज
बैंक अधिकारियों ने कहा है कि श्री शंकर लेआउट के मामले में पहले यह स्पष्ट किया जाएगा कि संबंधित प्लॉट 2019 में गिरवी रखे जाने से पहले बेचे गए थे या उसके बाद। अधिकारियों के मुताबिक, जिन संपत्तियों की बिक्री गिरवी रखने की तारीख से पहले हो चुकी थी, उन्हें वसूली की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता।
बैंक ने प्लॉट मालिकों से उनके दस्तावेज अलग-अलग जमा करने को कहा है, ताकि बिक्री विलेख और मॉर्गेज डीड की तारीखों का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सके।
गौरतलब है कि श्री गुरु राघवेंद्र सहकारा बैंक नियमिता दक्षिण बेंगलुरु का सहकारी बैंक था, जिसके वित्तीय संकट में फंसने के बाद पांच साल से अधिक समय पहले सैकड़ों जमाकर्ताओं की रकम प्रभावित हुई थी। अब पहले से बेची गई संपत्तियों को गिरवी रखकर कर्ज लेने के आरोपों ने बैंक से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्ति बंधक प्रक्रिया पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल खरीदार अपने दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों पर मालिकाना हक सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
