अमरेली। गुजरात के अमरेली जिले में दर्ज एक मामूली दिखने वाली साइबर ठगी की शिकायत ने जांच एजेंसियों को एक बड़े वित्तीय अपराध नेटवर्क तक पहुंचा दिया। शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लोगों को झांसा देकर रकम ठगने वाले एक कथित साइबर अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शुरुआती शिकायत में ठगी की राशि मात्र ₹96 हजार बताई गई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर आरोपी के बैंक खातों में दो महीनों के भीतर ₹2.74 करोड़ से अधिक की संदिग्ध राशि जमा होने का खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार, करीब 20 दिन पहले दर्ज हुई एक साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के आधार पर तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने मामले को साधारण ऑनलाइन ठगी से कहीं बड़ा बना दिया। इसके बाद पाटन जिले से महेनरजी मफाजी ठाकोर नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
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जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी लोगों को शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। कथित तौर पर निवेश पर असाधारण रिटर्न का वादा किया जाता था और विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों के जरिए लोगों को धन जमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता था। एक बार रकम जमा हो जाने के बाद पीड़ितों को या तो झूठे बहाने दिए जाते थे या उनसे संपर्क समाप्त कर दिया जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ गुजरात के विभिन्न हिस्सों में पहले से ही लगभग आठ साइबर धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। इससे संकेत मिलता है कि आरोपी लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल था और अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों को निशाना बना रहा था। अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक पीड़ितों की संख्या अभी सामने आए आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा आरोपी के बैंक खातों की जांच के दौरान हुआ। अधिकारियों के अनुसार, केवल दो महीनों की अवधि में उसके खातों में करीब ₹2.74 करोड़ की राशि जमा हुई। प्रारंभिक विश्लेषण से संकेत मिला है कि यह धनराशि विभिन्न साइबर ठगी मामलों से प्राप्त की गई हो सकती है। जांच एजेंसियां अब प्रत्येक लेनदेन का स्रोत और लाभार्थियों की पहचान करने का प्रयास कर रही हैं।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि अक्सर किसी एक शिकायत में नुकसान की राशि अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है, लेकिन जब आरोपी के बैंकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड की गहराई से जांच की जाती है, तब बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराध का खुलासा होता है। यही कारण है कि साइबर अपराधों में हर शिकायत को गंभीरता से लेना आवश्यक है, चाहे नुकसान की राशि कितनी भी कम क्यों न हो।
जांच में तकनीकी सर्विलांस, बैंकिंग डेटा विश्लेषण और मानव स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का इस्तेमाल किया गया। इसी संयुक्त प्रयास के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई गई और उसे गिरफ्तार किया गया। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या आरोपी किसी बड़े संगठित साइबर गिरोह का हिस्सा था या स्वतंत्र रूप से इस नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, निवेश आधारित साइबर ठगी आज देश में तेजी से बढ़ रही है। अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म का उपयोग कर लोगों को ऊंचे मुनाफे का सपना दिखाते हैं। शुरुआत में कुछ छोटे लाभ दिखाकर भरोसा बनाया जाता है और बाद में बड़ी रकम ठग ली जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल बैंक खाते फ्रीज करवाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर संगठित अपराध की दिशा में भी जांच की जानी चाहिए।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि धनराशि को समय रहते ट्रैक और फ्रीज किया जा सके।
फिलहाल आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है और पुलिस उसके वित्तीय नेटवर्क, संभावित सहयोगियों तथा अन्य पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
