मंदिर परिसर और विंध्य कॉरिडोर में वर्षों से निजी निगरानी का आरोप; प्रशासन, पुलिस और पांडा समाज संयुक्त बैठक में तय करेंगे नए सुरक्षा नियम

विंध्य धाम की सुरक्षा में निजी कैमरों की सेंध, पांच कैमरे जब्त; अब खंगाला जाएगा पूरा DBR

Roopa
By Roopa
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मिर्जापुर: मां विंध्यवासिनी मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंदिर परिसर और विंध्य कॉरिडोर के परिक्रमा पथ में बिना अनुमति लगाए गए निजी कैमरों की जांच कराई जाएगी। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे पांच कैमरे जब्त किए गए हैं। अब इन कैमरों की क्षमता, उनसे जुड़े कनेक्शन और उनके डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DBR) की जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनसे कितने समय से मंदिर परिसर की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और रिकॉर्डिंग कहां तक पहुंच रही थी।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मंदिर और कॉरिडोर की सुरक्षा के लिए पहले से ही अधिकृत कैमरों का नेटवर्क मौजूद है। इन कैमरों की व्यवस्था विंध्य विकास परिषद और पुलिस प्रशासन की निगरानी में की गई है। इसके बावजूद हालिया जांच में मंदिर परिसर में निजी स्तर पर कैमरे लगाए जाने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि इन कैमरों के जरिए मंदिर में होने वाली गतिविधियों को दूर बैठे लोगों द्वारा देखा जाता था।

वर्षों से निजी कैमरों से निगरानी का आरोप

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि निजी कैमरों के लंबे समय से सक्रिय होने की बात सामने आई है। प्रशासन को जानकारी मिली कि मंदिर परिसर में कुछ स्थानों पर निजी कैमरे लगाए गए थे और उनके जरिए घर या अन्य स्थान से बैठकर लगातार निगरानी की जा रही थी।

मंदिर परिसर जैसे संवेदनशील धार्मिक और सार्वजनिक स्थल पर निजी कैमरों की मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि इन कैमरों को किस उद्देश्य से लगाया गया था, किसके निर्देश पर लगाए गए और इनके जरिए रिकॉर्ड होने वाली तस्वीरों तक किन लोगों की पहुंच थी।

गुप्त कार्रवाई में कनेक्शन काटकर कैमरे जब्त

जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने पांडा समाज के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद बिना किसी सार्वजनिक हलचल के कार्रवाई करते हुए निजी कैमरों के कनेक्शन काटे गए और उन्हें कब्जे में ले लिया गया। कार्रवाई के दौरान मंदिर परिसर और विंध्य कॉरिडोर क्षेत्र में लगे पांच निजी कैमरों को हटाया गया।

अब इन कैमरों और उनके DBR की तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच में रिकॉर्डिंग की अवधि, स्टोरेज क्षमता, कैमरों की कवरेज और नेटवर्क कनेक्शन जैसी जानकारियां जुटाई जाएंगी। इसके अलावा यह भी पता लगाने का प्रयास होगा कि रिकॉर्ड किए गए वीडियो किसी अन्य डिवाइस या स्थान पर भेजे जाते थे या नहीं।

प्रशासन यह भी देखेगा कि निजी कैमरों की मदद से मंदिर के संवेदनशील हिस्सों, प्रवेश और निकास मार्गों या श्रद्धालुओं की गतिविधियों की निगरानी तो नहीं की जा रही थी।

यजमानों और आपसी विवादों पर नजर रखने की चर्चा

मंदिर परिसर में निजी कैमरे लगाए जाने के पीछे की मंशा को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह बात कही जा रही है कि कुछ कैमरों का इस्तेमाल पांडा समाज के सदस्यों के बीच आपसी विवादों और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था।

यह भी चर्चा है कि कैमरों के जरिए मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले यजमानों, उन्हें दर्शन कराने वाले लोगों और निकास द्वार के आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। हालांकि निजी कैमरे लगाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

प्रशासन अब इस पहलू की भी जांच करेगा कि क्या कैमरों से मिली जानकारी का इस्तेमाल किसी व्यक्ति, यजमान या दूसरे पक्ष के खिलाफ किया गया। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या सुरक्षा से समझौता करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

सुरक्षा नियमों में होगा बदलाव

मामले के बाद जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और पांडा समाज के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक प्रस्तावित है। बैठक में मंदिर और विंध्य कॉरिडोर की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। निजी कैमरों की अनुमति, निगरानी उपकरणों की स्थापना और रिकॉर्डिंग तक पहुंच से जुड़े नियमों को भी दोबारा देखा जाएगा।

प्रशासन का जोर इस बात पर रहेगा कि मंदिर परिसर में केवल अधिकृत और सुरक्षा मानकों के अनुरूप निगरानी व्यवस्था ही संचालित हो। नियमों में आवश्यक संशोधन के बाद उन्हें कड़ाई से लागू करने की तैयारी है।

मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी को देखते हुए प्रशासन अब कैमरा नेटवर्क को अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पांच निजी कैमरों और उनके DBR की जांच इस पूरे मामले में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे निजी निगरानी की वास्तविक अवधि, उद्देश्य और संभावित दायरे का पता चल सकता है।

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