फर्जी दस्तावेजों और जमीन के सौदे का झांसा देकर रकम ट्रांसफर कराने का आरोप; भेलूपुर पुलिस ने डॉ. अमित कुमार सिंह यादव को पकड़ा, मार्च में दो अन्य आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार

गोवा में जमीन दिलाने के नाम पर वाराणसी के कारोबारी से ₹16.62 करोड़ की ठगी, कोलकाता होटल से आरोपी गिरफ्तार

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By Roopa
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वाराणसी: गोवा में जमीन दिलाने के नाम पर वाराणसी के एक प्रॉपर्टी कारोबारी से ₹16 करोड़ 62 लाख 49 हजार की कथित धोखाधड़ी के मामले में भेलूपुर पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी डॉ. अमित कुमार सिंह यादव को कोलकाता के सुदीर स्ट्रीट स्थित एक होटल से पकड़ा। पूछताछ के बाद उसे रविवार को जेल भेज दिया गया। इस मामले में पुलिस मार्च में दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर चुकी है। अब जांच एजेंसी कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों और रकम के पूरे लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी लखनऊ के इंदिरानगर क्षेत्र के रवींद्रपल्ली स्थित न्यू नारायण नगर का निवासी है। उसके खिलाफ वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र की उपेंद्रनगर कॉलोनी निवासी अनुराग कुशवाहा की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। अनुराग अपने पार्टनर के साथ निर्माण और जमीन से जुड़े कारोबार में हैं। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने गोवा में जमीन का बड़ा सौदा कराने का भरोसा देकर उनसे करोड़ों रुपये हासिल किए।

गोवा की जमीन का सौदा कराने का दिया गया झांसा

शिकायत के अनुसार, देहरादून निवासी अमित कुमार सिन्हा ने अनुराग कुशवाहा से संपर्क किया था। उसने दावा किया कि गोवा में जमीन के मालिक विटोरियो जोस बेलहो की संपत्ति का सौदा कराया जा सकता है। जमीन को लेकर कारोबारी के सामने दस्तावेज और स्वामित्व से संबंधित कागजात भी प्रस्तुत किए गए।

सौदे को वास्तविक दिखाने के लिए जमीन मालिक का एक कथित सहयोगी वाराणसी स्थित अनुराग कुशवाहा के कार्यालय पहुंचा। वहां जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाए गए और सौदे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कारोबारी को दस्तावेजों और प्रस्तुत की गई जानकारी के आधार पर जमीन के स्वामित्व को लेकर भरोसा दिलाया गया।

इसके बाद जमीन के सौदे की रकम कोटक महिंद्रा बैंक की गोवा शाखा में स्थित एक खाते में ट्रांसफर कराई गई। शिकायत के मुताबिक, कुल ₹16 करोड़ 62 लाख 49 हजार की रकम इसी प्रक्रिया के तहत भेजी गई थी।

MOU और टाइटल सर्टिफिकेट से बढ़ा भरोसा

जांच के अनुसार, आरोपियों ने कथित सौदे को कानूनी रूप देने के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया भी पूरी कराई। 9 जुलाई 2024 को समझौता ज्ञापन यानी MOU के बाद जमीन को लेकर सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कराया गया। इसके बाद टाइटल सर्टिफिकेट भी जारी किया गया।

इस सर्टिफिकेट में विटोरियो जोस बेलहो को संबंधित जमीन का वैध मालिक बताया गया था। दस्तावेजों की मौजूदगी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के दावे से कारोबारी को सौदा वास्तविक होने का भरोसा हुआ। इसके बाद जमीन पर कब्जे और विकास से जुड़ी गतिविधियां शुरू करने की तैयारी की गई।

सफाई शुरू कराई तो सामने आया बड़ा विवाद

मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब संबंधित जमीन की साफ-सफाई का काम शुरू कराया गया। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला मौके पर पहुंची और उसने जमीन पर अपना अधिकार जताया। महिला के दावे के बाद जमीन के स्वामित्व को लेकर सवाल खड़े हो गए।

इसके बाद कारोबारी ने दस्तावेजों और जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच कराई। जांच आगे बढ़ने पर कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं। कारोबारी को पता चला कि जिस जमीन को वैध मालिक के जरिए बेचने का दावा किया गया था, उसके वास्तविक स्वामित्व को लेकर गंभीर विवाद मौजूद था।

मार्च में दो आरोपी गिरफ्तार, अब तीसरी गिरफ्तारी

मामले की शिकायत मिलने के बाद भेलूपुर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने मार्च में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब डॉ. अमित कुमार सिंह यादव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके कथित संपर्कों और भूमिका की पड़ताल कर रही है।

पुलिस ने आरोपी को कोलकाता के होटल से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे वाराणसी लाया गया और पूछताछ पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच में पुलिस बैंक खातों, मोबाइल फोन, दस्तावेजों और आरोपियों के बीच हुए संपर्कों की भी पड़ताल कर सकती है।

करोड़ों की रकम का पूरा ट्रेल खंगाल रही पुलिस

इतनी बड़ी रकम के लेनदेन को देखते हुए जांच का मुख्य फोकस अब पैसे के पूरे ट्रेल पर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ₹16.62 करोड़ से अधिक की रकम किस खाते में पहुंची, उसके बाद कहां-कहां ट्रांसफर हुई और इसमें कौन-कौन लोग लाभार्थी रहे।

इसके साथ ही जमीन से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता और उन्हें तैयार कराने में शामिल लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी जमीन के सौदे के नाम पर निशाना बनाया था।

मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस कथित फर्जीवाड़े में शामिल सभी लोगों की भूमिका और करोड़ों रुपये की ठगी की पूरी कड़ी सामने लाने का प्रयास करेगी।

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