वाराणसी: साइबर ठगी के खिलाफ कार्रवाई में वाराणसी पुलिस ने देशभर में फैले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए गिरोह के सरगना समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में आरोपियों से जुड़े 41 बैंक खातों में करीब ₹116.86 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर ‘एक्सपे एप’ के जरिए खाताधारकों के मोबाइल संदेशों तक पहुंच बनाकर बैंकिंग से जुड़े वन-टाइम पासवर्ड (OTP) हासिल करता था और इसके बाद साइबर ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता था।
कार्रवाई साइबर क्राइम सेल और चेतगंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने की। गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के रोहतास जिले के सासाराम निवासी नीतीश कुमार पांडेय भी शामिल है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों और ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
41 बैंक खातों में ₹116.86 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य आम लोगों को कम समय में अधिक मुनाफा या कमीशन दिलाने का लालच देते थे। इसके बाद उनके नाम पर कथित तौर पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाए जाते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता था।
जांच में सामने आया है कि इन खातों में निवेश धोखाधड़ी, सट्टेबाजी से जुड़े एप और अन्य ऑनलाइन साइबर अपराधों से हासिल रकम पहुंचाई जाती थी। पुलिस अब बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ₹116.86 करोड़ की संदिग्ध रकम किन स्रोतों से आई और आगे किन खातों में भेजी गई।
‘एक्सपे एप’ से मोबाइल संदेशों पर नियंत्रण का आरोप
पुलिस का दावा है कि आरोपी ‘एक्सपे एप’ का इस्तेमाल करते थे। जांच के मुताबिक, एप के जरिए खाताधारक के मोबाइल में संदेश अग्रेषित करने की सुविधा सक्रिय कर दी जाती थी। इसके बाद बैंक की ओर से भेजे जाने वाले संदेश और OTP आरोपियों तक पहुंचने लगते थे।
OTP हासिल होने के बाद आरोपी कथित तौर पर संबंधित बैंक खाते से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे। रकम को कई खातों में तेजी से घुमाने का उद्देश्य उसके वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल बनाना था। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि इस प्रक्रिया में कितने मोबाइल नंबर, बैंक खाते और डिजिटल उपकरण इस्तेमाल किए गए।
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143 शिकायतों ने खोली नेटवर्क की परत
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े 41 बैंक खातों के खिलाफ देशभर से 143 शिकायतें दर्ज मिली हैं। इससे संकेत मिला है कि नेटवर्क का संचालन केवल वाराणसी या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था।
पुलिस अब इन शिकायतों को संबंधित बैंक खातों और लेनदेन से जोड़कर देख रही है। जांचकर्ताओं के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि अलग-अलग साइबर ठगी की रकम किस खाते में पहुंची, उसे किसने निकाला और नेटवर्क में प्रत्येक आरोपी की भूमिका क्या थी।
सात मोबाइल, लैपटॉप और 40 डेबिट कार्ड बरामद
तलाशी और गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात स्मार्टफोन, एक लैपटॉप, 19 चेकबुक, 40 डेबिट कार्ड, 48 QR स्कैनर और दो वाहन बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग सामग्री की तकनीकी जांच की जा रही है।
पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद डेबिट कार्ड और बैंक दस्तावेज किन खातों से जुड़े हैं और उनका इस्तेमाल कथित साइबर ठगी की रकम को निकालने या ट्रांसफर करने में किया गया या नहीं।
डिजिटल सुरक्षा में OTP अकेला सुरक्षा कवच नहीं
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, ऐसे मामलों में बैंकिंग सुरक्षा को केवल OTP तक सीमित समझना जोखिम भरा हो सकता है। उनके अनुसार, यदि किसी अपराधी को मोबाइल संदेशों या खाते से जुड़े डिजिटल माध्यम तक अनधिकृत पहुंच मिल जाती है, तो वह बैंकिंग प्रक्रिया की अहम कड़ियों का दुरुपयोग कर सकता है। ऐसे मामलों में डिवाइस, बैंकिंग लॉग, सिम गतिविधि और धन के पूरे ट्रेल की संयुक्त जांच जरूरी होती है।
रकम फ्रीज कराने की कोशिश
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े खातों में मौजूद संदिग्ध रकम को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। जांच टीम बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरणों और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को जोड़कर नेटवर्क का विस्तार पता लगाने में जुटी है।
फिलहाल चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण उन लोगों तक पहुंचने पर केंद्रित है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी खाते खुलवाए, रकम ट्रांसफर कराई या पूरे नेटवर्क को संचालित किया। बरामद डिजिटल और बैंकिंग सामग्री की जांच से इस ₹116.86 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
