वालप्पाड वित्तीय घोटाले में ED ने कथित ₹20 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महिला आरोपी धन्या मोहन से पूछताछ की है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे मुआवजा घोटाला: मृत बहन की फर्जी सहमति बनाकर ₹2.62 करोड़ हड़पने का आरोप, पांच के खिलाफ मामला दर्ज

Roopa
By Roopa
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वडोदरा (गुजरात): गुजरात के वडोदरा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे से जुड़ा ₹2.62 करोड़ का कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपनी मृत बहन के नाम पर फर्जी सहमति (कंसेंट) दस्तावेज तैयार कर भूमि अधिग्रहण मुआवजे की राशि हासिल करने की साजिश रची। शिकायत के आधार पर रावपुरा पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, शिकायत रानू गांव निवासी 47 वर्षीय लालजीभाई सोमाभाई पाधियार ने दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया है कि शेरखी गांव स्थित सर्वे नंबर 377/8 की पैतृक जमीन उनकी दिवंगत मां सूरजबेन और उनके नाना खुशालभाई भालाभाई परमार के संयुक्त स्वामित्व में थी। वर्ष 2017 में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए इस जमीन का एक हिस्सा अधिग्रहित किया गया था।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2018 में मुआवजे की पहली किस्त के रूप में ₹3.26 करोड़ से अधिक की राशि उनके मामा छत्रसिंह खुशालभाई परमार को मिली, लेकिन इस रकम में से उनकी मां या परिवार को कोई हिस्सा नहीं दिया गया।

एफआईआर के अनुसार, सूरजबेन का निधन 10 जनवरी 2023 को हो गया था। इसके बावजूद गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी की जाने वाली ₹2.62 करोड़ से अधिक की दूसरी मुआवजा किस्त प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान 19 जुलाई 2024 को उनके नाम से कथित तौर पर एक फर्जी सहमति पत्र तैयार किया गया।

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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दस्तावेज पर मृत महिला की तस्वीर, कथित फर्जी अंगूठे का निशान और नोटरी प्रमाणीकरण दर्शाया गया, जबकि उस समय उनका निधन हो चुका था। पुलिस का कहना है कि इस कथित फर्जी दस्तावेज को विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर मुआवजे की राशि प्राप्त करने का प्रयास किया गया।

मामले में नाथुभाई खुशालभाई परमार, समंतसिंह अडेसिंह परमार, तखतसिंह, राजेंद्र परमार तथा नोटरी एला सी. पारेख को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि सभी ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उन्हें प्रमाणित करने में भूमिका निभाई।

शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि वैध उत्तराधिकारी होने के बावजूद उन्हें अब तक मुआवजे में उनका कानूनी हिस्सा नहीं मिला है। पुलिस अब दस्तावेजों की सत्यता, नोटरी रिकॉर्ड, भूमि अधिग्रहण से संबंधित फाइलों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक शोधकर्ता के अनुसार, संपत्ति और मुआवजा धोखाधड़ी के मामलों में अपराधी अक्सर फर्जी पहचान, जाली दस्तावेज, नकली हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान का इस्तेमाल कर सरकारी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेजों का डिजिटल और फोरेंसिक सत्यापन, वैध उत्तराधिकारियों की पहचान की पुष्टि तथा भुगतान से पहले बहु-स्तरीय जांच धोखाधड़ी रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

फिलहाल रावपुरा पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए, किन लोगों की भूमिका रही और मुआवजे की राशि प्राप्त करने के लिए किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई गई। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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