तिरुवनंतपुरम में किराये के कार्यालय से संचालित हो रहा था फर्जी लोन कॉल सेंटर; 41 कंप्यूटर, दो लैपटॉप जब्त, अमेरिकी नागरिकों का डेटा चुराकर देते थे धमकी

अमेरिकी कॉल सेंटर की आड़ में करोड़ों की ऑनलाइन लोन ठगी का भंडाफोड़: 10 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश तेज

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By Roopa
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तिरुवनंतपुरम: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में अमेरिकी कॉल सेंटर की आड़ में संचालित किए जा रहे एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन लोन ठगी नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह के दो कथित मास्टरमाइंड भी शामिल हैं, जबकि मुख्य सरगना आकाशदीप चौधरी की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर फर्जी लोन सेवाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, गिरोह तिरुवनंतपुरम के पोंगुम्मूडू इलाके में किराये के एक कार्यालय से अमेरिकी कॉल सेंटर के रूप में काम कर रहा था। स्थानीय लोगों को कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद पुलिस को सूचना मिली। प्रारंभिक स्तर पर मादक पदार्थों से जुड़े नेटवर्क की आशंका भी जताई गई थी, हालांकि अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो प्रमुख आरोपियों को भागने की कोशिश के दौरान गिरफ्तार किया। एक आरोपी को तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से और दूसरे को अहमदाबाद हवाई अड्डे से पकड़ा गया। जांच में पता चला कि अहमदाबाद से गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ गुजरात में भी इसी तरह के फर्जी कॉल सेंटर और ‘एडवांस अमेरिका’ नामक कंपनी के अधिकारी बनकर ठगी करने का मामला दर्ज है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर प्रदेश और बिहार के निवासी भी शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर इस फर्जी कॉल सेंटर में काम पर रखा गया था।

पुलिस का कहना है कि गिरोह का कथित सरगना आकाशदीप चौधरी पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही तिरुवनंतपुरम छोड़कर फरार हो गया। उसकी तलाश के लिए विभिन्न राज्यों में छापेमारी की जा रही है और उसके डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्कों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा हो सकेगा।

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छापेमारी के दौरान पुलिस ने 41 कंप्यूटर और दो लैपटॉप जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका के लोगों के सोशल सिक्योरिटी नंबर और अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर उनसे संपर्क करते थे। इसके बाद उन्हें संदेश भेजकर यह झूठा दावा किया जाता था कि यदि उन्होंने निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया तो उनका क्रेडिट स्कोर (क्रेडिट हिस्ट्री) खराब हो जाएगा। इस तरह डर और दबाव बनाकर उनसे धन वसूला जाता था।

अधिकारियों के अनुसार, ठगी की कुल राशि का अभी अंतिम आकलन नहीं हो सका है, लेकिन शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के संकेत मिले हैं। साइबर पुलिस जब्त कंप्यूटरों और डिजिटल उपकरणों से डेटा रिकवर कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कितने विदेशी नागरिक इस गिरोह का शिकार बने और कुल कितनी रकम की ठगी की गई। विशेष रूप से मुख्य आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर की फोरेंसिक जांच से कई अहम जानकारियां मिलने की उम्मीद है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह अब फर्जी कॉल सेंटर, सोशल इंजीनियरिंग और चोरी किए गए डिजिटल डेटा का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल सिक्योरिटी नंबर, बैंकिंग जानकारी और अन्य व्यक्तिगत डेटा अपराधियों के हाथ लगने पर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी संभव हो जाती है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण बेहद महत्वपूर्ण होता है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह ने संचालन के लिए केरल को ही क्यों चुना और क्या उन्हें स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति या संगठन से सहायता मिली थी। अधिकारियों का प्रारंभिक मानना है कि तिरुवनंतपुरम में बड़ी संख्या में वैध आईटी और बीपीओ कंपनियों की मौजूदगी का फायदा उठाकर आरोपियों ने अपने फर्जी कॉल सेंटर को वास्तविक कारोबारी गतिविधि जैसा दिखाने की कोशिश की। मामले की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि फरार सरगना की गिरफ्तारी के बाद इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के कई और अहम राज सामने आएंगे।

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