विजिलेंस की कार्रवाई में 86 अराजपत्रित कर्मचारी और 17 राजपत्रित अधिकारी शामिल; 89 ट्रैप ऑपरेशन सफल, लेकिन गवाहों के मुकरने से घट रही दोषसिद्धि दर

उत्तराखंड में रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा: अधिकारियों से पांच गुना ज्यादा कर्मचारी भ्रष्टाचार में पकड़े गए, 4 साल में 103 गिरफ्तार

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By Roopa
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देहरादून: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों का एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विजिलेंस विभाग (सतर्कता अधिष्ठान) की पिछले चार वर्षों की कार्रवाई में सामने आया है कि रिश्वत लेने के मामलों में अधिकारी नहीं बल्कि कर्मचारी अधिक संख्या में पकड़े गए हैं। जनवरी 2023 से अब तक विजिलेंस ने रिश्वत लेते हुए कुल 103 कार्मिकों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 86 अराजपत्रित कर्मचारी और 17 राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, रिश्वतखोरी के मामलों में कर्मचारियों की संख्या अधिकारियों से करीब पांच गुना अधिक रही है।

विजिलेंस विभाग के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदेशभर में लगातार ट्रैप कार्रवाई की जा रही है। जनवरी 2023 से अब तक कुल 89 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इन कार्रवाइयों में सरकारी विभागों में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

वर्षवार आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में विजिलेंस ने 18 ट्रैप कार्रवाई करते हुए 20 लोगों को गिरफ्तार किया था। वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई, जब 31 ट्रैप ऑपरेशन में 38 आरोपी पकड़े गए। वर्ष 2025 में 22 ट्रैप कार्रवाई के दौरान 26 लोगों की गिरफ्तारी हुई। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक 18 ट्रैप ऑपरेशन में 19 कर्मचारियों और अधिकारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया जा चुका है।

विजिलेंस निदेशक और एडीजी वी. मुरुगेशन ने बताया कि भ्रष्टाचार में शामिल सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है तो इसकी सूचना तुरंत विजिलेंस को दी जाए। उन्होंने विभाग के टोल-फ्री नंबर 1064 का व्यापक प्रचार करने पर भी जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकें।

हालांकि, विजिलेंस के सामने अब अदालतों में आरोपियों को सजा दिलाना बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2023 में रिश्वतखोरी से जुड़े 15 मामलों में आरोपियों को सजा मिली थी, लेकिन वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर आठ रह गई। वर्ष 2025 में केवल तीन मामलों में ही दोषियों को सजा दिलाई जा सकी।

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विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि सजा की दर कम होने का मुख्य कारण कई मामलों में गवाहों का अदालत में अपने बयान से पीछे हट जाना है। विशेष रूप से सरकारी गवाहों के बयान बदलने से अभियोजन पक्ष कमजोर हो जाता है, जिसका लाभ आरोपियों को मिलता है और वे अदालत से बरी हो जाते हैं। विजिलेंस अब ऐसे मामलों की समीक्षा कर रही है और बयान बदलने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी तथा विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी कर रही है।

इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों में जांच पूरी होने के बाद मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने में भी देरी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। एडीजी वी. मुरुगेशन के अनुसार, प्राथमिक गोपनीय जांच में दोषी पाए गए करीब 40 मामलों की फाइलें अभी सचिवालय स्तर पर अभियोजन स्वीकृति के लिए लंबित हैं। शासन से अनुमति मिलने के बाद ही इन मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो सकेगी।

भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने विजिलेंस विभाग में 20 नए पदों को मंजूरी दी है। इनमें वरिष्ठ सतर्कता अधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सहायक अभियंता, वित्तीय विशेषज्ञ, आईटी इंजीनियर, कानूनगो, ड्राफ्टमैन-सर्वेयर और कंप्यूटर प्रोग्रामर जैसे पद शामिल हैं। इसके अलावा तकनीकी जांच के लिए अनुबंध के आधार पर विशेषज्ञों की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। विभाग का लक्ष्य केवल रिश्वत लेने वालों को पकड़ना नहीं, बल्कि मजबूत पैरवी के जरिए दोषियों को अदालत से सजा दिलाने की दर बढ़ाना भी है। आने वाले समय में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और तेज करने की तैयारी की जा रही है।

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