उत्तराखंड में सितारगंज की फर्म से जुड़े फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए ₹150 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा, जीएसटी और इंटेलिजेंस टीम की जांच जारी।

फर्जी कंपनियों का जाल: उत्तराखंड में 150 करोड़ का टैक्स चोरी का मामला

Team The420
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नैनीताल। उत्तराखंड में जीएसटी विभाग और इंटेलिजेंस टीम ने संयुक्त रूप से एक उच्चस्तरीय जांच के बाद सितारगंज की एक कंपनी द्वारा 150 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों ने जांच के दौरान खुद कई फर्जी कंपनियां बनाकर दोषी फर्म का भरोसा जीतने की रणनीति अपनाई और इसके फर्जी फर्मों के नेटवर्क का पूरा नक्शा उजागर किया।

जांच में यह सामने आया कि कंपनी ट्रांसफार्मर की आपूर्ति करती थी और बंद हो चुकी फर्मों के नाम पर खरीद-बिक्री कर रही थी। राज्य कर विभाग की नजर इस फर्म पर चार महीने से थी। कंपनी का संचालन राज्य से बाहर से किया जा रहा था। विभाग को शक तब और गहरा हुआ जब पहली फर्म बंद होने के बावजूद कारोबार चालू था।

विशेष जांच ब्यूरो के संयुक्त आयुक्त रोशन लाल ने बताया कि अधिकारियों को दोषी फर्म का भरोसा जीतने में कई महीने लगे। उच्चस्तरीय टीम ने पूरे नेटवर्क का नक्शा तैयार किया और इंटेलिजेंस, इनकम टैक्स, ऊर्जा मंत्रालय और एआई तकनीक का सहारा लिया। कुल 32 अधिकारियों की टीम ने इनपुट एकत्र कर साक्ष्य जुटाए।

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जांच से पता चला कि कंपनी 2017 से संचालन में थी, लेकिन बाद में पहली फर्म को बंद कर दूसरी फर्म खोलकर पहले वाली कंपनी से चोरी-छिपे कार्य जारी रखे गए। विभाग ने पुख्ता साक्ष्य मिलने पर इंटेलिजेंस, जीएसटी पोर्टल, बैंकिंग डेटा, इनकम टैक्स और ऊर्जा मंत्रालय के टेंडर दस्तावेजों से मिलान कर जांच को अंतिम रूप दिया।

फर्जी फर्मों का नेटवर्क और धोखाधड़ी का तरीका

अधिकारियों के मुताबिक, फर्जी कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर कर चोरी की जाती थी। इन फर्मों के पंजीकृत पते वास्तविक नहीं थे और इनमें कोई व्यावसायिक कार्यालय मौजूद नहीं था। विभाग ने यह भी पाया कि कंपनी ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्मों का संचालन किया और बैंकिंग तथा वित्तीय गतिविधियों पर पूरा नियंत्रण अपने पास रखा।

जांच के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए फर्मों के पंजीकरण से पहले कड़ी जांच और सत्यापन आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नियमों का पालन ठीक से किया जाता तो इतनी बड़ी टैक्स चोरी को रोका जा सकता था।

विभागीय सहयोग और तकनीकी मदद

जांच में इनपुट जुटाने और फर्म का विश्वास जीतने के लिए जीएसटी, इंटेलिजेंस, इनकम टैक्स और ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। एआई तकनीक का इस्तेमाल कर बड़े नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की उच्चस्तरीय कार्रवाई से अन्य राज्यों में भी संभावित धोखाधड़ी की जांच बढ़ाई जा सकेगी।

एसटीएफ और विभाग ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की गहन जांच जारी है। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भविष्य में सिस्टम में मौजूद कमियों को दूर किया जा सके।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दोषी कंपनी ने अपने कारोबार के नाम पर कई बंद फर्मों का उपयोग कर अपनी गतिविधियों को छुपाया। विभाग ने पुष्टि की कि पूरे नेटवर्क का खुलासा होने के बाद अन्य राज्यों में भी इसी तरह की जांच बढ़ाई जाएगी ताकि सिस्टम में मौजूद कमियों को रोका जा सके।

 

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