नई दिल्ली: अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने पाकिस्तानी मूल के 65 वर्षीय मुर्तज़ा अली (Murtaza Ali) के खिलाफ नागरिकता समाप्त (Denaturalization) करने की कार्रवाई शुरू की है। सरकार का आरोप है कि अली ने अलग-अलग पहचान और नामों का इस्तेमाल कर वर्षों तक अमेरिकी इमिग्रेशन प्रणाली को गुमराह किया और कथित धोखाधड़ी के जरिए 2009 में अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली। यदि अदालत सरकार के दावों को स्वीकार कर लेती है, तो उनकी नागरिकता रद्द होने के बाद उन्हें अमेरिका से निर्वासित किया जा सकता है।
न्याय विभाग के अनुसार, मुर्तज़ा अली ने इमिग्रेशन लाभ प्राप्त करने के लिए कई अलग-अलग नामों से आवेदन दायर किए। जांच में सामने आया कि उन्होंने “मोर्टाज़ा अली” और “मुहम्मद इकबाल” सहित कम से कम तीन अलग-अलग पहचान का उपयोग किया। इन्हीं में से एक पहचान “मुहम्मद इकबाल” के नाम पर उन्हें इमिग्रेशन लाभ मिला और बाद में 2009 में अमेरिकी नागरिकता भी प्रदान कर दी गई।
मामले का खुलासा तब हुआ जब विशेषज्ञों ने विभिन्न इमिग्रेशन आवेदनों के साथ जमा किए गए फिंगरप्रिंट का विश्लेषण किया। जांच में निष्कर्ष निकला कि “मोर्टाज़ा अली” और “मुहम्मद इकबाल” नामों से जमा किए गए फिंगरप्रिंट एक ही व्यक्ति के थे। इसके बाद अधिकारियों ने पूरे रिकॉर्ड की दोबारा जांच शुरू की, जिसमें कथित पहचान छिपाने और झूठी जानकारी देने के कई आरोप सामने आए।
अमेरिका के टेक्सास के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट में संघीय अभियोजकों ने वर्ष 2014 में अली पर अमेरिकी एजेंसी को झूठे और महत्वपूर्ण बयान देने का आरोप लगाया था। उसी वर्ष उन्होंने अदालत में दोष स्वीकार करते हुए माना कि उन्होंने इमिग्रेशन लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से तीन अलग-अलग पहचान का उपयोग करते हुए तीन अलग-अलग आवेदन दाखिल किए थे।
अब 14 जुलाई 2026 को अमेरिकी सरकार ने टेक्सास के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत में चार आरोपों वाला नागरिकता समाप्ति का मुकदमा दायर किया है। सरकार का कहना है कि अली ने इमिग्रेशन धोखाधड़ी कर नागरिकता प्राप्त की, ऐसे गैरकानूनी कार्य किए जो उनके नैतिक आचरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, प्राकृतिककरण (Naturalization) प्रक्रिया के दौरान शपथ लेकर झूठी गवाही दी और महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाकर तथा गलत जानकारी देकर अमेरिकी नागरिकता हासिल की।
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यह कार्रवाई अमेरिकी प्रशासन द्वारा हाल में शुरू किए गए व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। न्याय विभाग ने बताया कि अली के अलावा नौ अन्य प्राकृतिककृत नागरिकों के खिलाफ भी नागरिकता समाप्त करने की कार्रवाई शुरू की गई है। इन मामलों में बाल यौन शोषण, मेडिकेयर धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन सभी व्यक्तियों ने अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करते समय महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं या झूठे दावे किए।
कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि जिन लोगों ने गलत बयानी और तथ्यों को छिपाकर नागरिकता प्राप्त की, वे कानून के अनुसार अपेक्षित अच्छे नैतिक चरित्र की शर्त पूरी नहीं करते। उनके अनुसार न्याय विभाग प्राकृतिककरण प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में आक्रामक कार्रवाई जारी रखेगा।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) की ओर से भी इस कार्रवाई का समर्थन किया गया। विभाग का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में धोखाधड़ी की है, तो वह अमेरिकी नागरिकता बनाए रखने का अधिकार खो देता है। विभाग ने संकेत दिया कि उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का उपयोग करते हुए ऐसे मामलों में नागरिकता समाप्त कर संबंधित व्यक्तियों को देश से हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी।
न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा कि प्राकृतिककरण प्रक्रिया के दौरान धोखाधड़ी करने वाले लोगों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में आगे भी कई नए मुकदमे दायर किए जा सकते हैं। अब इस मामले में अंतिम फैसला संघीय अदालत को करना है, जिसके आधार पर मुर्तज़ा अली की अमेरिकी नागरिकता और संभावित निर्वासन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
