वॉशिंगटन/होनोलूलू: अमेरिकी वायुसेना से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में टेक्सास के एक पूर्व अधिकारी ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। इस मामले में करीब ₹300 करोड़ (लगभग 37 मिलियन डॉलर) की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, जिसे सुनियोजित तरीके से सरकारी ठेकों के जरिए अंजाम दिया गया।
आरोपी Alan Hayward James, जो अमेरिकी वायुसेना में मास्टर सार्जेंट रह चुका है, ने वायर फ्रॉड, रिश्वतखोरी और बोली में हेरफेर (बिड रिगिंग) जैसे गंभीर आरोपों को स्वीकार किया। यह मामला Hawaii के संघीय न्यायालय में सामने आया, जहां अमेरिकी न्याय विभाग ने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
जांच में सामने आया कि आरोपी 2016 से 2025 के बीच प्रशांत क्षेत्र में वायुसेना के आईटी कॉन्ट्रैक्ट तैयार करने की जिम्मेदारी संभाल रहा था। इसी पद का फायदा उठाकर उसने सरकारी ठेकों की लागत को जानबूझकर बढ़ाया और अतिरिक्त रकम को अपने और अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।
फर्जी कंपनियों और कोडनेम से चलता था पूरा खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने इस घोटाले को छिपाने के लिए कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया। इन कंपनियों के जरिए पैसा घुमाया जाता था और फर्जी वेतन, बोनस तथा अन्य सुविधाओं के रूप में रकम बांटी जाती थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी और उसके सहयोगी एक-दूसरे के लिए कोडनेम का इस्तेमाल करते थे। वह खुद को “अल कैपोन” कहता था, जबकि अपने सहयोगियों को “गॉडफादर” और “गॉडमदर” जैसे नामों से संबोधित करता था। इतना ही नहीं, उसने अपने माता-पिता के लिए भी “कैपोन M” और “कैपोन D” जैसे नाम तय कर रखे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने खातों में आने वाली अतिरिक्त रकम का बाकायदा रिकॉर्ड रखता था, ताकि नेटवर्क के भीतर पैसों का हिसाब-किताब स्पष्ट बना रहे। सालाना तौर पर उसके खातों में ₹8 लाख से ₹1.6 करोड़ तक की रकम जमा होती रही।
बोली प्रक्रिया में हेरफेर कर दिलाए ठेके
मामले में एक अहम खुलासा यह भी हुआ कि आरोपी ने कंपनियों को जानबूझकर “कम और बेवकूफी भरी” बोली लगाने की सलाह दी, ताकि वे आसानी से ठेका जीत सकें। इसके बाद वास्तविक लागत को बढ़ाकर सरकारी खजाने से ज्यादा पैसा निकाला जाता था।
इस तरह, आरोपी ने न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि उन कंपनियों को भी नुकसान पहुंचाया जो ईमानदारी से प्रतिस्पर्धा कर रही थीं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क पूरी तरह संगठित और लंबे समय तक सक्रिय रहा।
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ऐशो-आराम पर उड़ाया गया सरकारी पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि घोटाले से हासिल रकम का इस्तेमाल व्यक्तिगत ऐशो-आराम के लिए किया गया। आरोपी ने अपने सहयोगियों को Oahu के नॉर्थ शोर स्थित एक लग्जरी रिसॉर्ट में दो रातों की ऑल-एक्सपेंस-पेड यात्रा भी कराई।
इसके अलावा, कई लोगों को बिना किसी काम के “सैलरी” दी जाती रही, जबकि वे कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े किसी वास्तविक कार्य में शामिल नहीं थे। इस तरह सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।
सरकारी बयान: भरोसे को पहुंचा गहरा नुकसान
अमेरिकी अभियोजन पक्ष के वरिष्ठ अधिकारी Ken Sorenson ने कहा कि इस तरह की बिड रिगिंग और भ्रष्टाचार न केवल करदाताओं के पैसे की चोरी है, बल्कि सरकारी संस्थानों में जनता के भरोसे को भी कमजोर करता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि बाजार में हेरफेर करने और अनुचित लाभ कमाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
कड़ी सजा और भारी जुर्माना तय
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी को अब अधिकतम 20 साल की सजा हो सकती है। इसके अलावा उस पर ₹2 करोड़ से अधिक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। आरोपी ने अमेरिकी सरकार को कम से कम ₹12 करोड़ (लगभग 1.45 मिलियन डॉलर) की राशि वापस करने पर भी सहमति जताई है।
वैश्विक स्तर पर चेतावनी का मामला
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह सरकारी सिस्टम के भीतर रहकर लंबे समय तक बड़े स्तर पर वित्तीय अपराध किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि रक्षा और सार्वजनिक ठेकों में पारदर्शिता और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के संगठित घोटालों को रोका जा सके।
