नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कथित अंतरराष्ट्रीय हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक चीनी नागरिक भी शामिल है, जिसे जांच एजेंसियां कथित तौर पर इस नेटवर्क का मुख्य संचालक मान रही हैं। यह कार्रवाई नोएडा के सेक्टर-93 स्थित एक फ्लैट में की गई, जहां से फर्जी पहचान दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, कंपनी से जुड़े कागजात, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क, विदेशी कनेक्शन और धन के प्रवाह की जांच कर रही हैं।
STF के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चीन निवासी लियाओ लॉन्गहुई, गाजियाबाद निवासी संजीव कुमार और औरैया निवासी कौशलेंद्र के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि लियाओ लॉन्गहुई वर्ष 2018 में भारत आया था, लेकिन वर्ष 2020 में उसका वीजा समाप्त हो गया था। इसके बाद भी वह कथित रूप से भारत में अवैध रूप से रहकर गतिविधियां संचालित कर रहा था। तलाशी के दौरान उसके पास से एक कथित फर्जी आधार कार्ड बरामद किया गया, जिसमें उसकी फोटो लगी थी, लेकिन नाम “सैम्युअल लोंगहा” और पता कोहिमा, नगालैंड दर्ज था।
जांच के अनुसार, लियाओ लॉन्गहुई अपने ससुर मुंगेन यू और साले क्वीपिंग टेंग के साथ मिलकर नोएडा सेक्टर-83 में वाईटीएल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी संचालित कर रहा था। यह कंपनी मोबाइल कवर बनाने का काम करती थी। अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के दौरान लियाओ वैध पहचान और आव्रजन दस्तावेज पेश नहीं कर पाया, जिसके बाद उसके सेक्टर-93 स्थित ठिकाने की तलाशी ली गई। तलाशी में कथित तौर पर फर्जी मोहरें, चेकबुक, बैंक दस्तावेज, पहचान पत्र और कंपनी से जुड़े रिकॉर्ड मिले, जिसके बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में STF को जानकारी मिली कि आरोपी संजीव कुमार, जो पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) है, कथित तौर पर शेल कंपनियां बनाने, बैंक खाते खुलवाने और दस्तावेज तैयार करने में अहम भूमिका निभाता था। जांचकर्ताओं का दावा है कि नोएडा सेक्टर-83 के एक ही पते पर कई कंपनियां पंजीकृत पाई गई हैं, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से वित्तीय लेनदेन को छिपाने और धन को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जा सकता है। एजेंसियां अब इन कंपनियों के कारोबार और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।
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जांच में हांगकांग में पंजीकृत कुछ कंपनियों से भी कथित संबंध सामने आए हैं। अधिकारियों को संदेह है कि एचके हानको कम्युनिकेशन ट्रेडिंग कंपनी और एचके इंचियो लिमिटेड जैसी विदेशी कंपनियों का इस्तेमाल सीमा पार धन हस्तांतरण और हवाला लेनदेन के लिए किया गया हो सकता है। एजेंसियां बैंक खातों, आयात-निर्यात दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अवैध धन किस तरह देश से बाहर भेजा गया।
STF के अनुसार, आरोपियों ने चीन से आयात किए जाने वाले कच्चे माल की कीमतों में कथित हेरफेर की और तैयार उत्पादों को दिल्ली के करोलबाग, नेहरू प्लेस समेत विभिन्न बाजारों में अंडर-इनवॉइसिंग के माध्यम से बेचा। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरीके से कथित रूप से अवैध धन अर्जित किया गया और बाद में हवाला चैनलों के जरिए विदेश भेजने की कोशिश की गई। अब पूरे वित्तीय नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
कार्रवाई के दौरान STF ने पांच लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, एक टैबलेट, विभिन्न कंपनियों की दस मोहरें, 11 बैंक चेकबुक, दो चीनी पासपोर्ट, पैन कार्ड, पहचान दस्तावेज, कंपनी गठन से जुड़े रिकॉर्ड और करीब ₹4.72 करोड़ के चेक व नकदी बरामद किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
जांच में रवि कुमार ढक्कर उर्फ नटवरलाल का नाम भी सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, वह वर्ष 2019 में वाईटीएल मैन्युफैक्चरिंग में शेयरधारक था और कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कंपनी का पैन और जीएसटी पंजीकरण कराया गया था। वह पहले से ही धोखाधड़ी और विदेशी अधिनियम से जुड़े मामलों में गौतमबुद्ध नगर जेल में बंद है।
मामले में नोएडा के फेस-2 थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कनेक्शन को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हो सकती हैं।
