उत्तर प्रदेश में अनुदानित मदरसों में भर्ती नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उन रिपोर्टों पर जवाब मांगा है, जिनमें दावा किया गया है कि भर्ती पर रोक के बावजूद 45 से अधिक नियुक्तियां कर दी गईं।
अधिकारियों के अनुसार, यह विवाद तब सामने आया जब एक शिकायत दर्ज कराई गई जिसमें आरोप लगाया गया कि अप्रैल से मई 2025 के बीच राज्य सरकार की स्पष्ट रोक के बावजूद अनुदानित मदरसों में बड़ी संख्या में भर्तियां की गईं। इस मामले ने विभागीय प्रक्रियाओं और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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मानवाधिकार कार्यकर्ता तलहा अंसारी ने NHRC में विस्तृत शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन रजिस्ट्रार ने सरकारी निर्देशों को दरकिनार करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से कई नियुक्तियों को मंजूरी दी। शिकायत के बाद आयोग ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से पूरे मामले की परिस्थितियों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
शिकायत में जिन संस्थानों का उल्लेख किया गया है, उनमें प्रयागराज स्थित मदरसा अरबिया अशरफुल उलूम, अलीया मिस्बाहुल उलूम, गाजीपुर का बहरूल उलूम ओरिएंटल कॉलेज, कानपुर का मदरसा अल-जामेअतुल अरबिया गौसिया, अयोध्या का मदरसा दारुल उलूम और बाराबंकी का मदरसा इस्लामिया अरबिया बहरूल शामिल हैं। इन सभी संस्थानों में कथित रूप से नियमों के विपरीत नियुक्तियां की गईं।
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला फिलहाल अल्पसंख्यक निदेशालय में प्रारंभिक जांच के चरण में है, जहां भर्ती से जुड़े दस्तावेज, स्वीकृतियां और प्रशासनिक रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों द्वारा यह भी जांच की जा रही है कि क्या इन नियुक्तियों के लिए आवश्यक अनुमति और प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
NHRC ने विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि रोक के बावजूद नियुक्तियां कैसे की गईं और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई है। आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए गए हैं।
इसी बीच, उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग ने प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक डिजिटल पहल शुरू की है। प्रमुख सचिव संयुक्ता समद्दार ने जूम के माध्यम से यूपी मदरसा शिक्षा परिषद के पोर्टल पर विकसित “कोर्ट केस मॉड्यूल” का शुभारंभ किया।
अधिकारियों के अनुसार, यह नया मॉड्यूल विभाग से जुड़े लंबित मुकदमों की वास्तविक समय (real-time) जानकारी उपलब्ध कराएगा। इसके जरिए जिला स्तर के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामलों की स्थिति सीधे ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे।
इस पहल का उद्देश्य अदालतों से जुड़े मामलों की जानकारी में पारदर्शिता बढ़ाना और विभागीय स्तर पर समन्वय को मजबूत करना है। इससे जिला कार्यालयों, निदेशालय और शासन स्तर के बीच सूचना आदान-प्रदान तेज और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली पूरे प्रदेश में लंबित मामलों की सतत निगरानी सुनिश्चित करेगी और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रबंधन में सुधार लाएगी। साथ ही इससे प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक ओर जहां NHRC भर्ती अनियमितताओं की जांच कर रहा है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की शुरुआत प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल NHRC को विभागीय जवाब का इंतजार है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वहीं कोर्ट केस मॉड्यूल को आने वाले हफ्तों में सभी जिलों में लागू किए जाने की तैयारी है।
