भूरा प्रधान GST सिंडिकेट मामले में डिजिटल सबूतों, फर्जी फर्मों और अफसरों की कथित मिलीभगत की जांच करती SIT।

यूपी: 59 बोगस फर्मों के जरिए 500 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी; एक फर्म से 100 करोड़ का खेल हुआ उजागर

Team The420
3 Min Read

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 59 फर्जी कंपनियों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी का मामला एसटीएफ ने उजागर किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने कई राज्यों में फर्में बनाकर धोखाधड़ी की। गरीब और जरूरतमंद लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियों का पंजीकरण कराया गया और उनके बैंक खातों व अन्य एक्सेस पर पूरा नियंत्रण रखा गया।

एसटीएफ ने इंदिरानगर में दर्ज जीएसटी चोरी के मामले में गुजरात के भावनगर निवासी केशवानी अब्बास हुसैन रमजान अली को पुणे से गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में पता चला कि आराध्या इंटरप्राइजेज नामक फर्म के जरिए आरोपी और उसके साथी रईस ने लगभग 100 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की। गहन जांच में यह सामने आया कि आरोपी कुल 59 फर्मों का संचालन कर रहा था, जिनमें से सभी फर्जी हैं।

इन सभी फर्मों के माध्यम से कुल 500 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की गई। एसटीएफ के अनुसार, इन फर्मों का एक्सेस पूरी तरह से केशवानी और रईस के पास था। ये कंपनियां उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, मुंबई और कर्नाटक समेत कई राज्यों में पंजीकृत थीं। इनमें से चार फर्में, आराध्या इंटरप्राइजेज, एसएम ट्रेडर्स, राठौर इंटरप्राइजेज और गौड़ ट्रेडिंग, लखनऊ के पते पर दर्ज हैं, जिन पर कार्रवाई की गई है।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

फर्म का संचालन और बैंक खाता भिन्न राज्य में

विशेष रूप से आराध्या इंटरप्राइजेज जो ₹100 करोड़ की धोखाधड़ी में शामिल थी, उसका पंजीकरण इंदिरानगर, लखनऊ में था, जबकि इसका बैंक खाता गुजरात के भावनगर में संचालित हो रहा था। बाकी तीन फर्मों में भी यही स्थिति पाई गई। वास्तविकता में फर्मों के पंजीकृत पतों पर कोई कार्यालया या व्यवसाय मौजूद नहीं था।

एसटीएफ के अनुसार, आरोपी गरीब और जरूरतमंद लोगों को फर्जी दस्तावेज बनवाने के लिए प्रलोभन देता था और उनके आधार पर फर्मों का संचालन करता था। सभी वित्तीय और बैंकिंग गतिविधियों पर उसका और उसके साथी का नियंत्रण रहता था।

विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

फर्जी पतों पर फर्मों के पंजीकरण के इस मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। एसटीएफ की जांच और पहले सामने आए मामलों से स्पष्ट है कि कई स्तरों पर फर्जीवाड़ा होता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फर्मों के पंजीकरण से पहले सत्यापन और नियमों का पालन ठीक से किया जाता, तो ऐसे बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी को रोका जा सकता था।

एसटीएफ ने फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क के खुलासे के बाद अन्य राज्यों में भी जांच बढ़ाई जाएगी ताकि सिस्टम में मौजूद कमियों को दूर किया जा सके।

 

हमसे जुड़ें

Share This Article