लंदन/वेस्ट मिडलैंड्स: यूनाइटेड किंगडम में टैक्स फ्रॉड से जुड़े एक चर्चित मामले में भारतीय मूल के एक दंपति को अदालत ने सजा सुनाई है। आरोप है कि 13 साल के निदेशक पद पर प्रतिबंध के बावजूद भी उन्होंने कई वर्षों तक कंपनियों का संचालन जारी रखा। जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला लगभग ₹20 करोड़ के टैक्स घोटाले से जुड़ा है, जिसने ब्रिटेन के कारोबारी तंत्र में पारदर्शिता और भरोसे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में भारत जोगिया (71) को वर्ष 2014 में कंपनी डायरेक्टर के रूप में अयोग्य घोषित किया गया था। यह प्रतिबंध उन्हें उस समय लगाया गया था जब उन्होंने अपनी कंपनी के जरिए टैक्स विभाग से गलत तरीके से करीब ₹20 करोड़ से अधिक का दावा करने की बात स्वीकार की थी। इसके बावजूद, आरोप है कि उन्होंने इस प्रतिबंध की अनदेखी करते हुए कई कंपनियों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, भारत जोगिया ने डायमंड फार्मा लिमिटेड और BHJ कंसल्टिंग लिमिटेड जैसी कंपनियों को अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित किया। आधिकारिक दस्तावेजों में भले ही उनका नाम प्रमुख रूप से सामने नहीं आता था, लेकिन वास्तविक संचालन, वित्तीय फैसले और कर्मचारियों के प्रबंधन में उनकी सीधी भूमिका पाई गई।
इस पूरे मामले में उनकी पत्नी लुईस जोगिया (57) को भी दोषी ठहराया गया है। अदालत में यह साबित हुआ कि उन्होंने अपने पति को बचाने के लिए एक ‘फ्रंट’ के तौर पर काम किया। BHJ कंसल्टिंग लिमिटेड में वह आधिकारिक निदेशक के रूप में दर्ज थीं, लेकिन कंपनी से जुड़े अधिकांश अहम निर्णय भारत जोगिया ही लेते थे।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, भारत जोगिया ने कंपनी से जुड़े कानूनी मामलों में वकीलों को निर्देश दिए, वित्तीय दस्तावेजों को मंजूरी दी, कर्मचारियों का प्रबंधन किया और विभिन्न कारोबारी समझौतों को अंतिम रूप दिया। इतना ही नहीं, डायमंड फार्मा लिमिटेड में उन्होंने सलाहकार के रूप में काम करते हुए लगभग ₹80 लाख से अधिक की फीस भी प्राप्त की।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि उनके प्रबंधन के दौरान डायमंड फार्मा लिमिटेड पर लगभग ₹4.5 करोड़ से अधिक का टैक्स बकाया हो गया था। बाद में इस कंपनी को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं, BHJ कंसल्टिंग लिमिटेड के खातों का इस्तेमाल निजी खर्चों के भुगतान के लिए भी किया गया, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
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जांच एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “भारत जोगिया ने पांच साल से अधिक समय तक प्रतिबंध का उल्लंघन कर कानून के प्रति खुली अवहेलना दिखाई। वहीं, लुईस जोगिया ने उन्हें छिपाने और संचालन जारी रखने में सक्रिय सहयोग दिया।” अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के मामलों से व्यापारिक व्यवस्था में भरोसा कमजोर होता है और नियमों की सख्ती पर सवाल उठते हैं।
अदालत ने भारत जोगिया को नौ महीने की जेल की सजा सुनाई है, जिसे 18 महीने के लिए निलंबित रखा गया है। साथ ही उन्हें 100 घंटे की बिना वेतन सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, उन्हें अगले 10 वर्षों तक कंपनी निदेशक बनने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।
वहीं, लुईस जोगिया को सात महीने की जेल की सजा दी गई है, जिसे 18 महीने के लिए निलंबित रखा गया है। उन्हें भी 10 वर्षों तक कंपनी निदेशक बनने से प्रतिबंधित किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दोनों ने भविष्य में किसी भी नियम का उल्लंघन किया, तो उन्हें जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर आरोपी कानूनी खामियों और दूसरे व्यक्तियों के नाम का उपयोग कर सिस्टम को चकमा देने की कोशिश करते हैं। यह मामला भी दिखाता है कि कैसे प्रतिबंधित होने के बावजूद कंपनियों का संचालन परोक्ष रूप से जारी रखा गया।
यह फैसला न केवल टैक्स फ्रॉड के खिलाफ सख्त संदेश देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर देर-सवेर कार्रवाई होती है। यूके की जांच एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों पर और कड़ी निगरानी रखी जाएगी, ताकि व्यापारिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
