महामारी के दौरान PPE आपूर्ति के नाम पर बहु-मिलियन डॉलर की कथित धोखाधड़ी; अदालत ने भारतीय मूल के दंपति और उनके कारोबारी सहयोगी को दोषी ठहराया, जांच एजेंसी का आरोप—धन का इस्तेमाल लग्जरी कारों, गहनों, विदेशी छुट्टियों और घर के नवीनीकरण पर किया गया

ब्रिटेन में भारतीय मूल के दंपति को COVID-19 PPE घोटाले में दोषी ठहराया गया, पोर्शे, रोलेक्स और आलीशान जीवनशैली पर उड़ाए करोड़ों रुपये

Roopa
By Roopa
5 Min Read

नई दिल्ली: ब्रिटेन में भारतीय मूल के एक दंपति को COVID-19 महामारी के दौरान पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) की आपूर्ति के नाम पर बहु-मिलियन डॉलर की कथित धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया गया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि मेडिकल ग्लव्स की आपूर्ति के लिए खरीदारों से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल ऑर्डर पूरा करने के बजाय आलीशान जीवनशैली पर किया गया। मामले में दंपति के एक कारोबारी सहयोगी को भी दोषी ठहराया गया है। तीनों को 21 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी।

दोषी ठहराए गए आरोपियों की पहचान 59 वर्षीय जोगेश भंडारी, उनकी 58 वर्षीय पत्नी मीनाक्षी (मीना) भंडारी और 43 वर्षीय क्रेग मॉरिस के रूप में हुई है। मॉरिस वर्ष 2020 और 2021 के दौरान PPE से जुड़े कई सौदों में दंपति की कंपनी का प्रतिनिधित्व करता था। लीसेस्टर क्राउन कोर्ट में पांच सप्ताह तक चली सुनवाई के बाद तीनों को दोषी करार दिया गया।

ब्रिटेन की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) के अनुसार, आरोपियों ने दावा किया था कि वे उस समय लाखों बॉक्स नाइट्राइल ग्लव्स की आपूर्ति कर सकते हैं, जब COVID-19 महामारी के दौरान दुनिया भर के अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और व्यवसायों में PPE की भारी मांग थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, जोगेश भंडारी ने वर्ष 2020 में नाइट्राइल ग्लव्स के कारोबार के लिए एक कंपनी बनाई थी और उसने अमेरिका के लुइसियाना के तत्कालीन सहायक अटॉर्नी जनरल फ्रैंक लैब्रूज़ो के साथ मिलकर कथित तौर पर एक फर्जी एस्क्रो व्यवस्था तैयार की। आरोप है कि खरीदारों की धनराशि को सुरक्षित रखने के बजाय उसे भंडारी, लैब्रूज़ो और उनसे जुड़ी कंपनियों के खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

NCA के अनुसार, पहला कथित फर्जी सौदा नवंबर 2020 में 1.2 करोड़ बॉक्स नाइट्राइल ग्लव्स की आपूर्ति के लिए किया गया था। जांच में आरोप है कि एस्क्रो खाते में सुरक्षित रहने के बजाय धनराशि तुरंत आरोपियों के नियंत्रण वाले खातों में भेज दी गई। इसके एक महीने बाद लगभग 27 लाख डॉलर और जमा किए गए, जिनमें से करीब 5 लाख डॉलर का इस्तेमाल कथित तौर पर भंडारी दंपति के निजी कर्ज चुकाने में किया गया।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि जोगेश भंडारी ने 12.5 करोड़ डॉलर तक की बैंक शेष राशि दर्शाने वाले फर्जी बैंक स्टेटमेंट और जाली वित्तीय प्रमाणपत्रों का उपयोग कर आपूर्तिकर्ताओं को यह विश्वास दिलाया कि उसके पास बड़े पैमाने पर PPE आपूर्ति करने की पर्याप्त वित्तीय क्षमता है।

जांच के अनुसार, वर्ष 2021 की शुरुआत में भंडारी को अमेरिका के अस्पतालों के लिए नाइट्राइल ग्लव्स की आपूर्ति के बदले 31.8 लाख डॉलर से अधिक की राशि प्राप्त हुई, लेकिन कथित तौर पर ग्लव्स की आपूर्ति कभी नहीं की गई। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि अंतिम योजना 1.8 अरब डॉलर के प्रस्तावित PPE अनुबंध से जुड़ी थी, जिसमें एक आपूर्तिकर्ता ने 13.5 लाख डॉलर का भुगतान उस कथित फर्जी पत्र के आधार पर किया था, जिसमें दावा किया गया था कि पहली खेप की सुरक्षा के लिए भंडारी ने 3.5 करोड़ डॉलर जमा कराए हैं।

NCA के अनुसार, PPE खरीदने के बजाय कथित तौर पर इस धन का उपयोग विलासितापूर्ण जीवनशैली पर किया गया। जांच में सामने आया कि दंपति ने £126,000 मूल्य की पोर्शे कार, रोलेक्स घड़ियां, महंगे आभूषण, लग्जरी छुट्टियां और घर के व्यापक नवीनीकरण पर बड़ी रकम खर्च की। इसके अलावा ऑडी A5, लैंड रोवर डिस्कवरी और फॉक्सवैगन गोल्फ जैसी कारें भी खरीदी गईं।

जांचकर्ताओं ने भंडारी और मॉरिस के बीच आदान-प्रदान किए गए लगभग 47,000 व्हाट्सएप संदेश भी बरामद किए, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया। एजेंसी का आरोप है कि इन संदेशों से महामारी के दौरान PPE की भारी मांग का फायदा उठाकर आर्थिक लाभ कमाने की कथित योजना का संकेत मिलता है।

तीनों आरोपियों को फरवरी 2023 में NCA की जांच के बाद गिरफ्तार किया गया था। एजेंसी का कहना है कि इस कथित धोखाधड़ी के कारण महामारी के दौरान आवश्यक PPE वास्तविक जरूरतमंद संस्थाओं तक नहीं पहुंच सका, जिससे गंभीर वित्तीय नुकसान और व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ा। NCA ने कहा कि बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, इस मामले से जुड़े फ्रैंक लैब्रूज़ो और एक अन्य आरोपी को अमेरिका में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।

हमसे जुड़ें

Share This Article