वैश्विक रिपोर्टों के मुताबिक online scams से सालाना $1 ट्रिलियन से अधिक नुकसान हो रहा है, जबकि AI tools और Southeast Asia scam compounds ने खतरे को और बढ़ा दिया है।

धोखाधड़ी पर सख्ती की नई रणनीति’: UK Fraud Strategy 2026–2029 में बड़ा बदलाव, अब ‘रोकथाम’ पर फोकस

Team The420
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लंदन। यूनाइटेड किंगडम की नई ‘फ्रॉड स्ट्रैटेजी 2026–2029’ ने धोखाधड़ी से निपटने के तरीके में एक अहम बदलाव का संकेत दिया है। जहां पहले फोकस धोखाधड़ी होने के बाद उसकी जांच और प्रभाव को संभालने पर रहता था, वहीं अब इस रणनीति में अपराध को पहले ही रोकने और उसके नेटवर्क को तोड़ने पर जोर दिया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस रणनीति की असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन में होगी।

सरकार ने इस नई रणनीति के तहत एक बड़े कदम के रूप में ‘ऑनलाइन क्राइम सेंटर’ (OCC) स्थापित करने की घोषणा की है, जो अप्रैल 2026 से काम शुरू करेगा। इसके लिए करीब ₹320 करोड़ (लगभग £31 मिलियन) का बजट तय किया गया है। इस सेंटर का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों, तकनीकी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग को बढ़ावा देना है, ताकि धोखाधड़ी के मामलों को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

इस रणनीति का मुख्य आधार ‘डिसरप्शन’ यानी अपराधियों के नेटवर्क और उनके इस्तेमाल किए जाने वाले टूल्स को खत्म करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब धोखाधड़ी केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें संगठित गिरोह, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यापक उपयोग हो रहा है।

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वित्तीय अपराध से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए केवल सहयोग पर्याप्त नहीं होगा। विभिन्न क्षेत्रों—सरकार, बैंकिंग, टेक कंपनियों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों—के बीच बेहतर तालमेल के साथ-साथ स्पष्ट जवाबदेही भी तय करनी होगी।

हाल के आंकड़े बताते हैं कि UK में APP (Authorised Push Payment) फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों को बड़ी रकम वापस की जा रही है। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच ऐसे मामलों में करीब 88% यानी ₹1,800 करोड़ (लगभग £173 मिलियन) तक की राशि पीड़ितों को लौटाई गई। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है, क्योंकि इसका आर्थिक बोझ मुख्य रूप से बैंकिंग सेक्टर पर पड़ता है।

इसी संदर्भ में यह बहस भी तेज हो गई है कि धोखाधड़ी की जिम्मेदारी केवल बैंकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। कई मामलों में धोखाधड़ी की शुरुआत सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से होती है, ऐसे में इन कंपनियों को भी आर्थिक और कानूनी जिम्मेदारी के दायरे में लाने की मांग उठ रही है।

नई रणनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को भी अहम स्थान दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, AI आधारित एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग टूल्स के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तेजी से की जा सकती है। हालांकि, यह भी चेतावनी दी गई है कि अपराधी भी AI का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह एक तरह की ‘टेक्नोलॉजी रेस’ बन गई है।

साइबर अपराध के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए रियल-टाइम डेटा शेयरिंग को इस रणनीति का अहम हिस्सा माना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि धोखाधड़ी के मामले सेकंडों में अंजाम दिए जाते हैं, ऐसे में पारंपरिक रिपोर्टिंग सिस्टम पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए तेज, स्वचालित और इंटेलिजेंस-आधारित सिस्टम की जरूरत है।

हालांकि, कुछ जानकारों ने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा क्वालिटी को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि डेटा सटीक और विश्वसनीय नहीं होगा, तो AI आधारित सिस्टम भी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाएंगे।

कुल मिलाकर, UK की यह नई फ्रॉड स्ट्रैटेजी दिशा के लिहाज से मजबूत मानी जा रही है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ लागू किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, असली सफलता तभी मानी जाएगी जब धोखाधड़ी को पहले ही रोक लिया जाए, अपराधियों के नेटवर्क को तेजी से तोड़ा जाए और डिजिटल सिस्टम पर लोगों का भरोसा बहाल हो सके।

 

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