नई दिल्ली। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में ब्रिटेन सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer ने कहा कि यह कदम बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल लत को लेकर बढ़ती चिंताओं के चलते उठाया गया है।
प्रधानमंत्री स्टारमर ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून को अगले साल से पूरी तरह लागू करने की योजना है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को ऐसे डिजिटल माहौल से बचाना है, जहां वे लगातार हानिकारक कंटेंट, साइबर बुलिंग और एल्गोरिद्म आधारित लत के संपर्क में आते हैं। स्टारमर ने इसे केवल राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि एक अभिभावक के तौर पर लिया गया जिम्मेदार कदम बताया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि टेक कंपनियां इस फैसले का विरोध करती हैं, तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
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सरकारी योजना के अनुसार, इस विधेयक को क्रिसमस से पहले संसद में पेश किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे अगले वर्ष की शुरुआत में लागू किया जा सकता है। इसके लागू होते ही 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ता प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग नहीं कर पाएंगे।
इस प्रस्तावित प्रतिबंध के दायरे में कई बड़े प्लेटफॉर्म शामिल हो सकते हैं, जिनमें टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (पूर्व ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट, रेडिट, किक और ट्विच जैसे ऐप शामिल हैं। साथ ही रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि कुछ गेमिंग ऐप्स, लाइव स्ट्रीमिंग सेवाएं और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी आंशिक रूप से इस प्रतिबंध के दायरे में आ सकते हैं।
हालांकि सरकार कुछ डिजिटल सेवाओं को इस प्रतिबंध से बाहर रखने पर भी विचार कर रही है। खासकर चैटबॉट्स और कुछ गेमिंग फीचर्स को छूट दी जा सकती है। इसके अलावा “डिजिटल कर्फ्यू” जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है, जिसके तहत किशोरों के लिए देर रात सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाई जा सकती है।
इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले ब्रिटेन सरकार ने व्यापक सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया अपनाई थी, जिसमें लगभग 1.16 लाख लोगों ने अपनी राय दी। इसमें माता-पिता, शिक्षक, तकनीकी विशेषज्ञ और बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश लोगों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का समर्थन किया।
ब्रिटेन की संस्कृति मंत्री Lisa Nandy ने बताया कि यह कदम केवल प्रतिबंध तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक ऑनलाइन सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी, कंटेंट मॉडरेशन और उम्र सत्यापन जैसे उपायों को और मजबूत किया जाएगा ताकि नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वैश्विक स्तर पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ते रुझान का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम या उम्र आधारित प्रतिबंध लागू किए जा चुके हैं।
सरकार का कहना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाने के लिए जरूरी है, जिनमें अत्यधिक स्क्रीन टाइम, मानसिक तनाव, फर्जी जानकारी और ऑनलाइन शोषण जैसी समस्याएं शामिल हैं। साथ ही सरकार यह भी मानती है कि टेक कंपनियों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने में अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी।
अगर यह नीति लागू होती है, तो ब्रिटेन में सोशल मीडिया उपयोग के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका असर लाखों किशोरों और उनके परिवारों पर पड़ेगा।
