यूट्यूब वीडियो से शुरू हुआ संपर्क, फर्जी ऐप डाउनलोड कराकर KYC के नाम पर रकम ट्रांसफर; मुनाफा न मिलने पर खुला धोखे का खेल

‘ट्रेडिंग ऐप का झांसा, व्हाट्सऐप ग्रुप का जाल’: उडुपी की शिक्षिका से ₹11.75 लाख की साइबर ठगी

Roopa
By Roopa
5 Min Read

मंगलुरु/उडुपी। कर्नाटक के उडुपी जिले में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जहां 51 वर्षीय शिक्षिका को सुनियोजित तरीके से जाल में फंसाकर ₹11.75 लाख की ठगी कर ली गई। शुरुआती तौर पर यह मामला निवेश के आकर्षक वादों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भरोसा जीतने की रणनीति का उदाहरण बनकर उभरा है।

पीड़िता, जो शिवल्ली क्षेत्र की निवासी हैं, ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने यूट्यूब पर ट्रेडिंग से जुड़े एक वीडियो को देखने के बाद संबंधित मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड किया। वीडियो में निवेश पर अधिक रिटर्न का दावा किया गया था, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने आगे की प्रक्रिया शुरू की। शुरुआती दिनों में उन्हें छोटे-छोटे लाभ दिखाकर विश्वास बनाया गया, जिसके बाद उन्हें एक व्हाट्सऐप ग्रुप से जोड़ दिया गया।

इस ग्रुप में खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ बताने वाले लोग नियमित तौर पर ट्रेडिंग टिप्स और निवेश सलाह साझा करते थे। पीड़िता को ‘A20 स्टॉक मार्केट प्रॉफिट गाइड’ नामक ग्रुप में शामिल किया गया, जहां अन्य सदस्यों के फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट और सफलता की कहानियां साझा कर माहौल बनाया गया। इसी दौरान उन्हें एक अन्य लिंक भेजा गया, जिसके माध्यम से ‘SALT Cap’ नामक एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा गया।

शिक्षिका ने बताए गए निर्देशों का पालन करते हुए एप डाउनलोड किया और उसमें अपनी केवाईसी से जुड़ी जानकारी भी भर दी। इसके बाद उन्हें एक तथाकथित ट्रेडिंग कंपनी ‘Saltovo Capital Exclusive Stock Account’ में निवेश करने के लिए कहा गया। भरोसे में आकर उन्होंने 6 मार्च से 14 मार्च के बीच अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल ₹11.75 लाख की राशि ट्रांसफर कर दी।

FutureCrime Summit 2026 Calls for Speakers From Government, Industry and Academia

शुरुआत में ऐप पर निवेश की राशि और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाया गया, जिससे पीड़िता का भरोसा और मजबूत हुआ। हालांकि जब उन्होंने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो उन्हें लगातार तकनीकी कारणों और अतिरिक्त शुल्क के नाम पर टाल दिया गया। कई बार प्रयास करने के बाद भी जब न तो मुनाफा मिला और न ही मूल रकम वापस आई, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ।

इसके बाद पीड़िता ने साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 (C) और 66 (D) के तहत तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग शामिल हैं और पैसे किन खातों में ट्रांसफर किए गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी पहले सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंच बनाते हैं, फिर उन्हें निजी ग्रुप में जोड़कर धीरे-धीरे भरोसा जीतते हैं। फर्जी ऐप और वेबसाइट के जरिए निवेश का दिखावटी डेटा दिखाया जाता है, जिससे व्यक्ति को लगता है कि उसका पैसा सुरक्षित और बढ़ रहा है।

प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर ठग अब सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं। वे भरोसा बनाने के बाद धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवाते हैं और जब तक पीड़ित को सच समझ आता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।”

उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान ऐप या लिंक के जरिए निवेश करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें। साथ ही, व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप्स में दिए जाने वाले निवेश सुझावों पर आंख बंद कर भरोसा करने से बचें।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ती साइबर ठगी अब आम लोगों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है, जहां एक छोटी सी चूक भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article