फर्जी लिस्टिंग, टाइटल विवाद और अवैध प्रोजेक्ट के जाल से बचने के लिए प्रॉपर्टी खरीदते समय पूरी जांच और सतर्कता जरूरी है

प्रॉपर्टी खरीद में एक गलती और जिंदगी भर का नुकसान: रियल एस्टेट फ्रॉड से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

Team The420
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नई दिल्ली। घर खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों ने इस सपने को जोखिम भरा बना दिया है। देशभर में फर्जी प्रॉपर्टी लिस्टिंग, अवैध कॉलोनियों, टाइटल विवाद और पजेशन में देरी जैसे मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही खरीदार की वर्षों की जमा पूंजी को खतरे में डाल सकती है।

रियल एस्टेट बाजार में बढ़ती गतिविधियों के बीच स्कैमर्स नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। खासकर बड़े शहरों और उनके आसपास के इलाकों में यह खतरा ज्यादा देखा जा रहा है, जहां तेजी से नए प्रोजेक्ट लॉन्च हो रहे हैं और खरीदार जल्दबाजी में फैसले ले लेते हैं।

फर्जी लिस्टिंग और सस्ते सौदे का लालच

रियल एस्टेट धोखाधड़ी का सबसे आम तरीका फर्जी लिस्टिंग है। स्कैमर्स प्रॉपर्टी की कीमत बाजार से काफी कम दिखाकर खरीदारों को आकर्षित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति रुचि दिखाता है, उससे टोकन मनी या एडवांस के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं और इसके बाद आरोपी गायब हो जाते हैं।

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इस तरह के मामलों में अक्सर खरीदार बिना साइट विजिट और दस्तावेजों की जांच किए ही भुगतान कर देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती साबित होती है।

टाइटल और ओनरशिप विवाद का खतरा

कई मामलों में यह सामने आया है कि जिस व्यक्ति ने प्रॉपर्टी बेची, वह उसका असली मालिक ही नहीं था। कुछ मामलों में एक ही प्रॉपर्टी पर कई लोगों का दावा होता है। ऐसे विवाद बाद में कोर्ट-कचहरी तक पहुंच जाते हैं और खरीदार को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने से पहले कम से कम 10–15 साल का ओनरशिप रिकॉर्ड जांचना जरूरी है।

अवैध प्रोजेक्ट और अधूरी मंजूरी

बिना सरकारी अनुमति या अधूरी मंजूरी वाले प्रोजेक्ट भी खरीदारों के लिए बड़ा जोखिम हैं। कई बिल्डर बिना जरूरी अप्रूवल के निर्माण शुरू कर देते हैं और बाद में प्रोजेक्ट फंस जाता है।

ऐसी स्थिति में न तो खरीदार को पजेशन मिलता है और न ही निवेश की गई रकम सुरक्षित रहती है। कई बार इन प्रोजेक्ट्स को गिराने तक की नौबत आ जाती है।

पजेशन में देरी: डबल नुकसान

रियल एस्टेट सेक्टर में पजेशन में देरी एक आम समस्या बन चुकी है। हजारों खरीदार ऐसे हैं, जिन्होंने पूरी रकम चुकाने के बाद भी सालों तक अपने घर का इंतजार किया है।

इस दौरान उन्हें एक तरफ बैंक लोन की EMI चुकानी पड़ती है और दूसरी तरफ किराया भी देना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ कई गुना बढ़ जाता है।

कैसे करें सुरक्षित निवेश

धोखाधड़ी से बचने के लिए सबसे पहला कदम है—प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन जांचना। हर बड़े प्रोजेक्ट का रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के तहत रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। इससे प्रोजेक्ट की वैधता, समयसीमा और बिल्डर की जानकारी मिलती है।

इसके अलावा, जमीन का टाइटल डीड, सभी सरकारी अप्रूवल, बिल्डिंग प्लान और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच करना भी अनिवार्य है। किसी भी तरह की शंका होने पर कानूनी सलाह लेना बेहतर होता है।

कैश डील और जल्दबाजी से बचें

यदि कोई डील बहुत सस्ती लग रही हो या बिल्डर तुरंत भुगतान के लिए दबाव बना रहा हो, तो सतर्क हो जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कैश में लेनदेन से बचें और हमेशा बैंकिंग चैनल के जरिए भुगतान करें।

साथ ही, सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें और बिना पढ़े किसी भी एग्रीमेंट पर साइन न करें।

बिल्डर की विश्वसनीयता जांचें

प्रोजेक्ट में निवेश से पहले बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड जांचना बेहद जरूरी है। उसके पिछले प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी, निर्माण गुणवत्ता, ग्राहक समीक्षा और कानूनी इतिहास को समझना चाहिए।

सिर्फ विज्ञापन या ब्रॉशर देखकर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है।

निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

रियल एस्टेट में निवेश जीवनभर की बचत से जुड़ा होता है, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाना जरूरी है। अधूरी जानकारी या जल्दबाजी में लिया गया फैसला भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

सही दस्तावेजों की जांच, कानूनी सलाह और सतर्कता ही आपको प्रॉपर्टी फ्रॉड से बचा सकती है। याद रखें—सपनों का घर खरीदते समय एक छोटी सी गलती भी आपको बड़ी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकती है।

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