केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु के दो साल से अधिक विलंबित पंजीकरण के लिए न्यायिक मंजूरी अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है।

त्रिपुरा DGP अनुराग ढंकर मौत मामला: मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर की होगी डिजिटल फॉरेंसिक जांच, हर पहलू की पड़ताल में जुटी पुलिस

Team The420
5 Min Read

नई दिल्ली: त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग ढंकर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच अब डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। त्रिपुरा पुलिस ने मामले की जांच के तहत दिवंगत अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया है। इनमें उनका मोबाइल फोन, लैपटॉप और पर्सनल कंप्यूटर शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन उपकरणों को विस्तृत डिजिटल फॉरेंसिक जांच के लिए राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (SFSL) भेजा जाएगा, जहां इनके डेटा, संचार रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया जाएगा।

1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अनुराग ढंकर सोमवार को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में अपने कार्यालय के वॉशरूम में मृत पाए गए थे। घटना के बाद पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। अब जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए अन्य सबूतों के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।

FutureCrime Summit 2026 Invites Serving Government Officers for Complimentary Participation at Bharat Mandapam

जांच अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण पूरा होने में लगभग डेढ़ महीने का समय लग सकता है। विशेषज्ञ इन उपकरणों से कॉल रिकॉर्ड, संदेश, ई-मेल, दस्तावेज, डिजिटल गतिविधियां और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच करेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना से पहले उनकी गतिविधियां क्या थीं और क्या कोई ऐसा डिजिटल संकेत मौजूद है, जो जांच में मदद कर सके।

पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जांच की अगली दिशा तय होगी। यदि रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि होती है, तो जांच का मुख्य फोकस उन परिस्थितियों और संभावित कारणों की पहचान करना होगा, जिनके चलते उन्होंने ऐसा कदम उठाया। हालांकि, फिलहाल जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना वाले दिन अनुराग ढंकर ने अपने स्टाफ को सुबह 11 बजे तक किसी भी व्यक्ति को अपने कक्ष में प्रवेश नहीं देने के निर्देश दिए थे। शिकायत के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी उनसे मिलने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। कुछ समय बाद जब ढंकर अपने कक्ष में वापस नहीं लौटे तो कर्मचारियों को संदेह हुआ। इसके बाद कमरे की तलाशी ली गई, जहां वॉशरूम का दरवाजा अंदर से बंद मिला। दरवाजा तोड़ने पर अधिकारी का शव बरामद हुआ।

इस घटना के बाद मामले ने राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। विपक्ष ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग दोहराई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इतने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मृत्यु के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्य सामने आ सकें।

कानूनी विशेषज्ञों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है। उनका कहना है कि प्रारंभिक परिस्थितियां चाहे जो भी संकेत दें, लेकिन अंतिम निष्कर्ष केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। ऐसे मामलों में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी संवेदनशील मृत्यु जांच में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल डिवाइस से प्राप्त जानकारी व्यक्ति के अंतिम संपर्कों, संचार, दस्तावेजों, ऑनलाइन गतिविधियों और समयक्रम को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि उपकरणों से कोई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलता है, तो वह जांच की दिशा तय करने में सहायक हो सकता है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं की वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम निष्कर्ष, डिजिटल विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में किसी भी कारण या परिस्थिति को लेकर आधिकारिक रूप से कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। कानून के अनुसार, जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही घटना के कारणों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

हमसे जुड़ें

Share This Article