ऑपरेशन 'तूफान' के दौरान पुलिस को कॉल सेंटर से संचालित कथित ऑनलाइन लोन ऐप गिरोह का मिला सुराग; विदेशी नागरिकों समेत बड़ी संख्या में लोगों को बनाया गया निशाना, डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

ड्रग्स की सूचना पर छापा, खुला अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन लोन ऐप रैकेट: तिरुवनंतपुरम से 20 संदिग्ध हिरासत में, 50 कंप्यूटर जब्त

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By Roopa
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तिरुवनंतपुरम: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में मादक पदार्थों की तस्करी की सूचना पर की गई पुलिस कार्रवाई के दौरान एक बड़े कथित ऑनलाइन लोन ऐप धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। शहर पुलिस ने श्रीकार्यं इलाके में संचालित एक संदिग्ध कॉल सेंटर पर छापा मारकर लगभग 20 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें कई अन्य राज्यों के निवासी भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मौके से करीब 50 कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि यह गिरोह ऑनलाइन लोन ऐप्स के माध्यम से देश-विदेश के लोगों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देता था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई जिला एंटी-नारकोटिक्स स्पेशल एक्शन फोर्स (DANSAF) द्वारा चलाए जा रहे मादक पदार्थ विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन तूफान’ के तहत की गई। शुरुआत में पुलिस को सूचना मिली थी कि श्रीकार्यं क्षेत्र में कुछ प्रवासी श्रमिक मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल हैं। इस इनपुट के आधार पर इलाके को निगरानी में रखा गया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई। इसके बाद जब पुलिस ने छापा मारा तो वहां कथित तौर पर ऑनलाइन लोन ऐप धोखाधड़ी से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क संचालित होता मिला।

जांच में सामने आया कि जिस परिसर पर छापा मारा गया, वहां से कथित रूप से कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। पुलिस का मानना है कि इसी केंद्र से लोगों को फोन, इंटरनेट कॉल और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क कर ऑनलाइन लोन ऐप्स से जोड़ने, ऋण दिलाने या अन्य वित्तीय सेवाओं का झांसा देकर ठगी की जाती थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक गिरोह की पूरी कार्यप्रणाली और वित्तीय नुकसान का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।

प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह का नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था। अधिकारियों के अनुसार विदेशी नागरिक भी कथित साइबर धोखाधड़ी के संभावित शिकार हो सकते हैं। पुलिस अब जब्त किए गए कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था, किन देशों और राज्यों के लोगों को निशाना बनाया गया तथा अवैध धन का प्रवाह किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों से किया गया।

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छापेमारी के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। पुलिस फिलहाल उनकी भूमिका, डिजिटल गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी की औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज नहीं की गई है। डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने और प्रत्येक संदिग्ध की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित कॉल सेंटर के संचालन के लिए उपयोग किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट नेटवर्क, सॉफ्टवेयर और संचार प्लेटफॉर्म किस प्रकार इस्तेमाल किए जा रहे थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क के तार देश के अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं। यदि जांच में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन या विदेशी पीड़ितों के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित केंद्रीय एजेंसियों से भी समन्वय किया जा सकता है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि ऑनलाइन लोन ऐप गिरोह अक्सर कॉल सेंटर मॉडल पर काम करते हैं और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को तत्काल ऋण, कम ब्याज दर या आसान स्वीकृति का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद वे पीड़ितों से व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण और केवाईसी दस्तावेज हासिल कर आर्थिक शोषण, अवैध वसूली या साइबर ठगी को अंजाम देते हैं। उनके अनुसार केवल अधिकृत और विनियमित वित्तीय संस्थानों के आधिकारिक ऐप्स का ही उपयोग करना चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध लोन ऐप को डाउनलोड करने या निजी जानकारी साझा करने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करनी चाहिए।

फिलहाल तिरुवनंतपुरम शहर पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है। डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, वित्तीय रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर गिरोह की वास्तविक संरचना, उसके संचालकों, संभावित सहयोगियों और पीड़ितों की संख्या का पता लगाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे गिरफ्तारियां, अतिरिक्त धाराएं और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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