तिरुवनंतपुरम में नशे की सूचना पर हुई कार्रवाई के दौरान अंतरराष्ट्रीय लोन ऐप फ्रॉड रैकेट का खुलासा हुआ है।

नशे की सूचना से खुला अंतरराष्ट्रीय लोन ऐप फ्रॉड का अड्डा: तिरुवनंतपुरम में 50 से ज्यादा कंप्यूटर जब्त, विदेशी नागरिक बने निशाना

Team The420
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तिरुवनंतपुरम: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में नशीले पदार्थों की तस्करी की सूचना पर शुरू हुई पुलिस कार्रवाई ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय लोन ऐप साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी लोन ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से जुड़े 10 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया है। हालांकि, पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण की प्रक्रिया जारी होने के कारण अभी उनकी औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज नहीं की गई है।

यह कार्रवाई श्रीकार्याम पुलिस और जिला एंटी-नारकोटिक स्पेशल एक्शन फोर्स (DANSAF) की संयुक्त टीम ने ‘ऑपरेशन तूफान’ के तहत की। पुलिस को पहले सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ प्रवासी संदिग्ध रूप से मादक पदार्थों की बिक्री में शामिल हैं। इसी सूचना के आधार पर की गई तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों को एक ऐसे परिसर का पता चला, जहां से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी का संचालन किया जा रहा था।

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छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 50 से अधिक कंप्यूटर, डिजिटल उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इन उपकरणों का उपयोग फर्जी लोन ऐप, ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए विदेशी नागरिकों को ठगने के लिए किया जा रहा था। पुलिस को संदेह है कि गिरोह तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर धोखाधड़ी चला रहा था।

जांच एजेंसियों के अनुसार शुरुआती विश्लेषण से पता चला है कि इस नेटवर्क के संभावित पीड़ित अमेरिका सहित कई अन्य देशों के नागरिक हैं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस गिरोह ने कुल कितने लोगों को निशाना बनाया और धोखाधड़ी की रकम कितनी है। पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए कंप्यूटरों, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क, उसके संचालन के तरीके और वित्तीय लेनदेन की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि श्रीकार्याम स्थित कथित ऑपरेशन सेंटर में देर रात तक डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने और डेटा सुरक्षित करने का काम जारी रहा। विशेषज्ञ टीमें जब्त किए गए सिस्टम से ईमेल, चैट रिकॉर्ड, कॉल डेटा, भुगतान संबंधी जानकारी और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं। यदि जांच में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन या विदेशी सर्वरों के उपयोग के प्रमाण मिलते हैं तो केंद्रीय एजेंसियों की सहायता भी ली जा सकती है।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या यह गिरोह केवल लोन ऐप धोखाधड़ी तक सीमित था या फिर फर्जी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन कर्ज वसूली, पहचान की चोरी और अन्य साइबर अपराधों में भी शामिल था। पुलिस संदिग्धों के बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, इंटरनेट कनेक्शन, संचार माध्यमों और संभावित सहयोगियों की भी पड़ताल कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का संचालन स्थानीय स्तर पर हो रहा था या इसके तार देश के अन्य राज्यों और विदेशों तक फैले हुए थे।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि लोन ऐप आधारित साइबर ठगी अब अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का रूप ले चुकी है। अपराधी फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म, कॉल सेंटर और तकनीकी उपकरणों के जरिए अलग-अलग देशों के लोगों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण, धन के प्रवाह की निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसी से पूरे नेटवर्क का खुलासा संभव हो पाता है।

फिलहाल पुलिस सभी डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने का इंतजार कर रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर संदिग्धों की औपचारिक गिरफ्तारी, संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करने और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा साबित हो सकती है।

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