ऑनलाइन भर्ती में बढ़ता खतरा; ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे रच रहे भरोसेमंद जाल, विशेषज्ञों ने दी सख्त चेतावनी

इंजीनियरिंग एडमिशन के नाम पर ठगी: ठाणे की महिला से ₹16.35 लाख हड़पे, तीन आरोपी नामजद

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By Roopa
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ठाणे: महाराष्ट्र के Thane शहर में इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर एक महिला से ₹16.35 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और झूठे वादों के जरिए पीड़िता को अपने जाल में फंसाया।

पुलिस के अनुसार, आरोपी—ताशिन खान (40), सैफ खान (42) और एक महिला श्रुति—ने मिलकर इस पूरे ठगी नेटवर्क को अंजाम दिया। शिकायत के आधार पर 2 अप्रैल को कापुर्बावड़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

अखबार के विज्ञापन से हुआ संपर्क

जांच में सामने आया कि पीड़िता ने जून 2025 में एक अखबार में प्रकाशित विज्ञापन देखा, जिसमें Mumbai के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन दिलाने का दावा किया गया था। विज्ञापन में संपर्क करने पर उसे आरोपियों के कापुर्बावड़ी स्थित ऑफिस बुलाया गया।

वहां आरोपियों ने खुद को कॉलेज से जुड़े प्रतिनिधि बताया और भरोसा दिलाया कि वे उसकी बेटी को आसानी से इंजीनियरिंग सीट दिला सकते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रक्रिया को ‘पक्का’ बताते हुए जल्द भुगतान करने का दबाव भी बनाया।

जून से नवंबर तक वसूली गई रकम

आरोप है कि जून से नवंबर 2025 के बीच पीड़िता से कुल ₹16.35 लाख वसूले गए। यह रकम नकद और बैंक ट्रांसफर—दोनों माध्यमों से ली गई। हर भुगतान के बाद आरोपियों ने उसे आश्वस्त किया कि एडमिशन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और सीट लगभग तय हो चुकी है।

पीड़िता को बार-बार यह भरोसा दिलाया गया कि उसकी बेटी का दाखिला तय है और उसे केवल औपचारिकताओं के पूरा होने का इंतजार करना होगा।

फर्जी रसीद और नकली मुहर से बनाया भरोसा

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने महिला को कॉलेज फीस की एक रसीद दी, जिस पर कथित तौर पर कॉलेज की मुहर और हस्ताक्षर थे। बाद में जांच में यह दस्तावेज फर्जी निकला।

इसी नकली रसीद के आधार पर पीड़िता को यकीन दिलाया गया कि एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस तरह, आरोपियों ने तकनीकी दस्तावेजों और आधिकारिक दिखने वाले कागजों का इस्तेमाल कर उसका भरोसा मजबूत किया।

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कॉलेज पहुंचने पर खुला राज

मामले का खुलासा तब हुआ, जब नवंबर 2025 में पीड़िता अपनी बेटी का पहचान पत्र लेने के लिए संबंधित कॉलेज पहुंची। वहां उसे बताया गया कि न तो कोई एडमिशन हुआ है और न ही इस नाम से कोई आवेदन दर्ज है।

इसके बाद पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ और उसने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिनमें आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर संगठित गिरोह सक्रिय होते हैं, जो शिक्षा के नाम पर लोगों को निशाना बनाते हैं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह ठगा है।

शिक्षा के नाम पर बढ़ती ठगी का ट्रेंड

हाल के वर्षों में एडमिशन से जुड़ी ठगी के मामलों में तेजी देखी गई है। खासतौर पर प्रोफेशनल कोर्स जैसे इंजीनियरिंग और मेडिकल में सीट दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूली जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों की जल्दबाजी और बेहतर भविष्य की चाहत का फायदा उठाकर ठग ऐसे जाल बुनते हैं। वे फर्जी दस्तावेज, नकली वेबसाइट और दिखावटी ऑफिस के जरिए खुद को असली एजेंट साबित करते हैं।

सतर्कता जरूरी, सीधे संस्थान से करें संपर्क

पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी कॉलेज एडमिशन के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट या सीधे संस्थान से संपर्क करें। किसी एजेंट या विज्ञापन के जरिए पैसे देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है।

ठाणे की यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी ठग सक्रिय हैं और जरा सी लापरवाही लाखों का नुकसान करा सकती है।

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