ठाणे: ठाणे की 29 वर्षीय महिला कारोबारी से सेलिब्रिटी के जरिए ब्रांड प्रमोशन कराने के नाम पर ₹20.60 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि हरियाणा स्थित एक फर्म के संचालक ने कारोबारी के कपड़ों के ब्रांड को बड़े सेलिब्रिटी और हाई-प्रोफाइल स्टाइलिस्ट के जरिए प्रचारित कराने का भरोसा दिया था। शिकायत के मुताबिक, प्रस्तावित प्रमोशनल अभियान के लिए ₹20.60 लाख कीमत के कपड़े अलग-अलग लोगों तक भेजे गए, लेकिन कथित तौर पर न तो वादा किया गया प्रमोशन हुआ और न ही कपड़ों का स्टॉक या उसकी कीमत वापस की गई।
मामले में 7 अगस्त को कासरवडवली थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2) के तहत आपराधिक विश्वासघात और धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सेलिब्रिटी कनेक्शन दिखाकर भरोसा जीतने का आरोप
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कारोबारी से संपर्क कर उसके कपड़ों के ब्रांड की मार्केटिंग और प्रमोशन का प्रस्ताव रखा। कारोबारी का भरोसा जीतने के लिए कथित तौर पर एक विस्तृत कंपनी ब्रोशर भी साझा किया गया, जिसमें प्रभावशाली लोगों और सेलिब्रिटी के साथ कंपनी के कथित संपर्क और समझौतों का उल्लेख था।
इन दावों पर भरोसा करते हुए कारोबारी ने प्रस्तावित प्रमोशनल अभियान के लिए कपड़ों का स्टॉक उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। इसके बाद करीब ₹20.60 लाख कीमत के कपड़े उन स्टाइलिस्ट और सेलिब्रिटी तक भेजे गए, जिनके बारे में आरोपी ने दावा किया था कि वे प्रमोशन से जुड़े हुए हैं।
शिकायत में आरोप है कि कपड़े इस समझ के साथ दिए गए थे कि उनका इस्तेमाल सेलिब्रिटी आधारित प्रमोशन और ब्रांड की पहुंच बढ़ाने के लिए किया जाएगा। कारोबारी को उम्मीद थी कि इस अभियान से उसके ब्रांड को प्रचार और नए ग्राहकों तक पहुंच मिलेगी।
सामान पहुंचा, लेकिन प्रमोशन नहीं हुआ
कारोबारी का आरोप है कि निर्धारित लोगों तक कपड़े पहुंचाए जाने के बाद भी वादा किया गया प्रमोशनल अभियान शुरू नहीं हुआ। इसके बजाय आरोपी ने कथित तौर पर कपड़ों के स्टॉक का गलत इस्तेमाल किया और कारोबारी समझौते में तय जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसे न तो अपेक्षित सेलिब्रिटी प्रमोशन मिला और न ही कपड़ों का स्टॉक वापस किया गया। उसने कथित तौर पर सामान या उसकी कीमत लौटाने की मांग की, लेकिन उसे रकम या स्टॉक वापस नहीं मिला।
पुलिस के अनुसार, कथित गतिविधियां जुलाई 2025 से अगस्त 2026 के बीच हुईं। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कपड़ों की आपूर्ति किस तरह हुई, सामान किन लोगों को भेजा गया और डिलीवरी के बाद उसका क्या हुआ।
लेनदेन और स्टॉक की पूरी कड़ी खंगालेगी पुलिस
शिकायत के बाद प्रारंभिक जांच की गई और उपलब्ध दस्तावेजों तथा कारोबारी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर FIR दर्ज की गई। अब जांच का प्रमुख फोकस ₹20.60 लाख कीमत के कपड़ों के स्टॉक की आवाजाही और उससे जुड़े लेनदेन पर है।
जांचकर्ता इनवॉइस, डिलीवरी रिकॉर्ड, कारोबारी बातचीत, समझौते से जुड़े दस्तावेज और उन लोगों की जानकारी जुटा सकते हैं, जिन्हें कथित तौर पर कपड़े भेजे गए थे। इन रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि सामान वास्तव में बताए गए स्टाइलिस्ट और सेलिब्रिटी तक पहुंचा था या नहीं।
पुलिस आरोपी फर्म की ओर से किए गए दावों और प्रमोशनल व्यवस्था की भी जांच करेगी। ब्रोशर में जिन सेलिब्रिटी और स्टाइलिस्ट के साथ कथित संबंध बताए गए थे, उनकी वास्तविकता की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। जांच यह स्पष्ट कर सकती है कि ये संपर्क वास्तविक थे या कारोबारी का विश्वास हासिल करने के लिए उनका कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं
पुलिस के मुताबिक, मामले में फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जांचकर्ता शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का सत्यापन कर रहे हैं।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि हरियाणा स्थित फर्म का संचालक अकेले इस कथित फर्जीवाड़े में शामिल था या कपड़ों के स्टॉक को हासिल करने, स्थानांतरित करने अथवा कथित तौर पर हड़पने में अन्य लोगों की भी भूमिका थी। मामले से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।
कपड़ों की डिलीवरी से जुड़े रिकॉर्ड, इनवॉइस, कारोबारी संवाद और अन्य दस्तावेज जांच में अहम साबित हो सकते हैं। इनसे यह समझने में मदद मिलेगी कि सामान किसके निर्देश पर भेजा गया और उसके बाद उसका क्या हुआ।
जांच के बाद साफ होगी ₹20.60 लाख के सामान की पूरी कहानी
मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है और लगाए गए आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं। पुलिस लेनदेन और स्टॉक की आवाजाही की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कपड़ों का इस्तेमाल वास्तव में प्रस्तावित प्रमोशनल अभियान के लिए किया गया या उन्हें कथित तौर पर किसी अन्य उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान कारोबारी समझौते की वास्तविक शर्तें, कपड़े प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान और सामान वापस नहीं किए जाने की परिस्थितियां भी सामने आ सकती हैं।
पुलिस के अनुसार, आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी। फिलहाल कथित धोखाधड़ी, कपड़ों के स्टॉक के कथित दुरुपयोग और आरोपी की भूमिका की जांच की जा रही है।
