नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र में डेटा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए संचार अवसंरचना प्रदाताओं को भारत के बाहर किसी भी दूरसंचार डेटा, लॉग या नेटवर्क संबंधी जानकारी साझा करने पर रोक लगा दी है। दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा जारी टेलीकम्युनिकेशंस (ऑथराइजेशन फॉर टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क) रूल्स, 2026 के तहत सभी अधिकृत संस्थाओं के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि उनके दूरसंचार नेटवर्क से जुड़ा पूरा डेटा, लॉग और अन्य संबंधित जानकारी केवल भारत में ही संग्रहित की जाएगी तथा उसकी कोई भी प्रति देश के बाहर रूट, साझा या उपलब्ध नहीं कराई जा सकेगी।
यह नया ढांचा टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 के तहत लाइसेंस आधारित व्यवस्था से सरल और हल्के नियामक ढांचे की ओर सरकार के संक्रमण का हिस्सा है। अधिसूचना के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर, डिजिटल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर, इंटरनेट एक्सचेंज पॉइंट प्रोवाइडर, सैटेलाइट अर्थ स्टेशन गेटवे, क्लाउड-होस्टेड टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर तथा राष्ट्रीय स्तर पर मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा प्रदाता इस नए प्राधिकरण ढांचे के तहत कार्य कर सकेंगे।
नियमों के मुताबिक प्रत्येक नई अधिकृत संस्था को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके दूरसंचार नेटवर्क से जुड़े सभी सिस्टम, डेटा, लॉग और अन्य सूचनाएं भारत में ही संग्रहित रहें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन जानकारियों की कोई भी कॉपी विदेश में भेजना, साझा करना या उपलब्ध कराना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा संप्रभुता और महत्वपूर्ण संचार अवसंरचना की सुरक्षा को मजबूत करना है।
सरकार को नए नियमों के तहत अनुपालन की निगरानी के लिए व्यापक अधिकार भी दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार दूरसंचार उपकरणों और नेटवर्क स्थापित किए गए स्थलों का निरीक्षण कर सकेगी। यदि सार्वजनिक हित में तत्काल कार्रवाई आवश्यक समझी जाती है, तो बिना पूर्व सूचना के भी निरीक्षण किया जा सकता है। इसके अलावा सरकार किसी नामित एजेंसी को अधिकृत संस्थाओं की प्रक्रियाओं और प्रणालियों का ऑडिट करने के लिए नियुक्त कर सकती है ताकि नियमों के पालन की पुष्टि की जा सके।
हालांकि अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियुक्त ऑडिट एजेंसी ऐसी किसी जानकारी का संग्रह या खुलासा नहीं करेगी जिससे किसी उपयोगकर्ता या अधिकृत संस्था की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो। इस प्रावधान का उद्देश्य नियामकीय निगरानी और व्यावसायिक गोपनीयता के बीच संतुलन बनाए रखना है।
नए नियमों के अनुसार दूरसंचार अवसंरचना स्थापित करने के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित सेवा प्रदाता की होगी। यदि राइट ऑफ वे (Right of Way) या अन्य स्वीकृतियों में देरी होती है, तो उसे नियमों के अनुपालन में विफलता का आधार नहीं माना जाएगा। यानी सेवा प्रदाता प्रशासनिक देरी का हवाला देकर अपनी नियामकीय जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकेंगे।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता के अनुसार दूरसंचार डेटा का स्थानीय स्तर पर भंडारण राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। इससे संवेदनशील नेटवर्क डेटा पर बेहतर नियंत्रण रहेगा, जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्यों तक समय पर पहुंच मिलेगी और महत्वपूर्ण संचार अवसंरचना को विदेशी साइबर खतरों से अतिरिक्त सुरक्षा प्राप्त होगी। हालांकि इसके साथ सेवा प्रदाताओं को मजबूत डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा उपायों और अनुपालन तंत्र में निवेश भी बढ़ाना होगा।
दूरसंचार और डेटा सेंटर उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से भारत में डेटा सेंटर उद्योग को गति मिलने की संभावना है। साथ ही क्लाउड-आधारित दूरसंचार नेटवर्क के विस्तार को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने सैटेलाइट गेटवे के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन जैसे लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, ताकि निजी क्षेत्र नए नियामकीय ढांचे का पूरा लाभ उठा सके।
