चेन्नई। तमिलनाडु में विवाह के लिए रिश्ता तलाश रहे युवकों को निशाना बनाने वाले साइबर ठगी के एक अनोखे मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, मुदिचूर निवासी 33 वर्षीय रामकुमार पंडियन ने खुद को महिला बताकर कई वैवाहिक वेबसाइटों पर फर्जी प्रोफाइल बनाए और पुरुषों से संपर्क किया। वह महिला की तस्वीरों का इस्तेमाल करता था और महिला जैसी आवाज में बातचीत कर prospective दूल्हों को विश्वास में लेता था। आरोपी ने खुद को आईआरएस अधिकारी प्रशिक्षु बताकर वीडियो कॉल से भी बचने का तरीका निकाला।
पुलिस के मुताबिक, रामकुमार वर्ष 2024 से अलग-अलग वैवाहिक मंचों पर ‘ऐश्वर्या’ नाम से प्रोफाइल चला रहा था। जब कोई युवक उससे वीडियो कॉल करने का अनुरोध करता तो वह दावा करता कि ‘ऐश्वर्या’ दिल्ली, फरीदाबाद या मसूरी में आईआरएस प्रशिक्षण ले रही है और प्रशिक्षण के नियमों के कारण वीडियो कॉल की अनुमति नहीं है। इस बहाने वह लंबे समय तक अपनी वास्तविक पहचान छिपाने में सफल रहा।
जांच में सामने आए एक मामले में काथिरवेडु निवासी 30 वर्षीय वास्तुकार कार्तिक ने अप्रैल में एक वैवाहिक वेबसाइट पर पंजीकरण कराया था। इसके बाद उसकी बातचीत ‘ऐश्वर्या’ से शुरू हुई। कुछ समय बाद कथित तौर पर उससे पैसों की मांग की गई। आरोपी ने बताया कि उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है और आर्थिक परेशानी के कारण उसे मदद की जरूरत है। पुलिस के अनुसार, रकम नहीं भेजने पर कथित तौर पर आत्महत्या करने की धमकी भी दी गई और पैसे ‘ऐश्वर्या’ के बताए भाई के बैंक खाते में भेजने को कहा गया।
पुलिस के अनुसार, कार्तिक ने 5 अप्रैल से 7 अगस्त के बीच अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹9.52 लाख उस खाते में भेजे। इसके बाद जब संपर्क टूट गया तो उसे ठगी का संदेह हुआ। उसने पश्चिम क्षेत्र की साइबर अपराध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक लेनदेन और मोबाइल नंबरों से मिले सुरागों के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसे थेनी जिले से गिरफ्तार कर लिया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उसके कब्जे से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, छह एटीएम कार्ड, दो पासबुक, दो चेकबुक और छह सिम कार्ड बरामद करने का दावा किया है। उसके पास से आईआरएस की एक मुहर और ‘नारकोटिक्स विभाग’ का नाम लिखा बोर्ड भी मिला। पुलिस ने आरोपी के बैंक खाते में मौजूद ₹1.52 लाख की रकम को भी फ्रीज कराया है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अलग-अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल कर खुद को कभी कथित दुल्हन, कभी उसकी मां और कभी उसके भाई के रूप में पेश करता था। शुरुआती जांच में पुलिस को लगा था कि इसके पीछे कई लोगों का गिरोह हो सकता है, लेकिन बाद में कथित तौर पर पता चला कि अलग-अलग पहचान बनाकर बातचीत करने का काम रामकुमार खुद ही करता था।
पुलिस का आरोप है कि रामकुमार ने केवल वैवाहिक पहचान का इस्तेमाल ही नहीं किया, बल्कि आईआरएस अधिकारी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी के रूप में भी अपनी पहचान बताकर दूसरे लोगों से सिम कार्ड और बैंक खाते हासिल किए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसने कितने लोगों को निशाना बनाया और अन्य खातों या मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किन मामलों में किया गया।
आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद रविवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस वैवाहिक वेबसाइटों पर बनाए गए उसके फर्जी प्रोफाइल, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और लेनदेन की आगे जांच कर रही है। मामले में अन्य संभावित पीड़ितों और ठगी से जुड़े लेनदेन का पता लगाने के लिए डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
