नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) शेयर बाजार में धोखाधड़ी और संदिग्ध कारोबार पर निगरानी मजबूत करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। बाजार नियामक के अधिकारी बड़ी मात्रा में उपलब्ध शेयर कारोबार के आंकड़ों का विश्लेषण करने और असामान्य गतिविधियों की पहचान करने के लिए एआई उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
मामले से परिचित लोगों के अनुसार, सेबी के विश्लेषक नियमित कामकाज के दौरान शेयरों के कारोबार की मात्रा, डेरिवेटिव सौदों और एल्गोरिदम से जुड़े पहचान संकेतकों सहित कई तरह के आंकड़ों की जांच करते हैं। एआई आधारित प्रणालियां इन विशाल आंकड़ों में ऐसे पैटर्न तलाशने में मदद करती हैं, जो सामान्य बाजार गतिविधि से अलग दिखाई दे सकते हैं।
निगरानी केवल शेयर बाजार के आधिकारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया मंचों और ऑनलाइन चर्चा मंचों पर शेयरों से जुड़े संदिग्ध सुझावों, प्रचार सामग्री और पोस्ट पर भी नजर रखी जा रही है। इन ऑनलाइन गतिविधियों का मिलान संबंधित शेयरों में हो रही वास्तविक खरीद-बिक्री से किया जाता है। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों की पहचान करना है, जिनमें किसी शेयर की कीमत या कारोबार को कृत्रिम रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।
विशेष रूप से ‘पंप एंड डंप’ जैसी संभावित योजनाओं का पता लगाने में इस तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसी व्यवस्था में किसी शेयर के बारे में बड़े पैमाने पर सकारात्मक प्रचार करके निवेशकों को आकर्षित करने और कीमत बढ़ने के बाद हिस्सेदारी बेचने जैसी गतिविधियों की जांच की जा सकती है। हालांकि, किसी असामान्य पैटर्न का सामने आना अपने आप में बाजार धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं होता और ऐसे मामलों में नियामकीय जांच तथा अन्य साक्ष्यों की जरूरत होती है।
एआई के इस्तेमाल से नियामक के लिए अलग-अलग स्रोतों से आने वाली सूचनाओं को एक साथ देखने की क्षमता बढ़ती है। किसी शेयर में अचानक कारोबार बढ़ने, डेरिवेटिव गतिविधियों में असामान्य बदलाव आने या सोशल मीडिया पर उसके प्रचार में तेजी जैसे संकेतों को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा सकता है। इससे संभावित संदिग्ध गतिविधियों की शुरुआती पहचान में मदद मिल सकती है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
बाजार में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नियामकों के सामने चुनौती भी बढ़ रही है। आधुनिक कारोबार में एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग, तेज गति से होने वाले लेनदेन और ऑनलाइन निवेश समुदायों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हुई है। ऐसे माहौल में केवल पारंपरिक निगरानी तरीकों से विशाल मात्रा में उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण करना कठिन हो सकता है।
एआई आधारित निगरानी इस चुनौती से निपटने का एक तरीका है, लेकिन इसके साथ मानवीय जांच की भूमिका बनी रहती है। किसी गतिविधि को संदिग्ध मानने के बाद उसके पीछे वास्तविक कारण, संबंधित खातों और कारोबारियों के बीच संबंध तथा संभावित लाभ या नुकसान जैसे पहलुओं की जांच जरूरी होती है।
सेबी की यह तकनीकी पहल ऐसे समय में सामने आई है जब सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों के जरिए निवेश संबंधी जानकारी तेजी से फैलती है। शेयरों को लेकर प्रचार, सुझाव और चर्चाएं कुछ ही समय में बड़ी संख्या में निवेशकों तक पहुंच सकती हैं। ऐसे में ऑनलाइन गतिविधियों और वास्तविक बाजार कारोबार के बीच संबंधों का विश्लेषण बाजार निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।
नियामक की एआई आधारित निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों को तेजी से चिन्हित करना और जांच के लिए विश्लेषकों को बेहतर आंकड़ा-आधारित संकेत उपलब्ध कराना है। इससे बाजार में संभावित धोखाधड़ी के पैटर्न की पहचान के साथ निगरानी प्रक्रिया को अधिक व्यापक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
