नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी और कथित गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की जांच के लिए नई विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच दल में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए, ताकि दानराशि से जुड़े वित्तीय लेनदेन और खातों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में 25 जुलाई को अधिसूचना जारी कर नई एसआईटी का गठन किया गया है।
सरकार ने अदालत को बताया कि नई एसआईटी का नेतृत्व लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस करेंगे। जांच दल में अयोध्या रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव ग्रोवर को भी सदस्य बनाया गया है। अदालत ने इस टीम को और अधिक सक्षम बनाने के लिए सुझाव दिया कि इसमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी शामिल किया जाए, ताकि वित्तीय रिकॉर्ड का विशेषज्ञ स्तर पर विश्लेषण किया जा सके।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार शीघ्र ही एसआईटी में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को शामिल करेगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जांच दल में पांचवें सदस्य के रूप में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी नियुक्त किया जाए। अदालत का मानना है कि वित्तीय विशेषज्ञों की मौजूदगी से चढ़ावे की राशि, बैंक खातों, लेखा रिकॉर्ड और धन के प्रवाह की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि इस मामले में सत्य सामने लाने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी दोहराया कि उसका उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुंचना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जांच बिना किसी पक्षपात के हो। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है और सभी संबंधित पहलुओं की गहन पड़ताल की जानी चाहिए।
यह मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दानराशि के कथित गबन से जुड़ा है। इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि क्या मामले की जांच के लिए नई एसआईटी गठित की जा सकती है। सरकार ने अदालत के सुझाव को स्वीकार करते हुए नई टीम का गठन किया और उसकी जानकारी अदालत को उपलब्ध कराई।
अब जांच एजेंसी को दानराशि के संग्रह, लेखांकन, बैंकिंग लेनदेन, कथित वित्तीय अनियमितताओं, संबंधित दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों की व्यापक जांच करनी होगी। फॉरेंसिक ऑडिट और वित्तीय विश्लेषण के आधार पर यह भी पता लगाया जाएगा कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसकी प्रकृति क्या थी, धन का प्रवाह किन माध्यमों से हुआ और उसमें किन व्यक्तियों की भूमिका रही। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक संस्थानों से जुड़े वित्तीय मामलों में स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट और विशेषज्ञ लेखा परीक्षण से जांच की विश्वसनीयता बढ़ती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गठित नई एसआईटी से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह सभी उपलब्ध साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर निष्पक्ष जांच कर निर्धारित समय के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
